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सरल, सादगीपूर्ण, सकारात्मक व्यक्तित्व के धनी थे पूर्व प्रधान मंत्री गुलजारी लाल नंदा - By पवन कुमार 'माहियान'

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तीन बार कार्यवाहक प्रधान मंत्री पद पर रहे गुलजारी लाल नंदा को मकान मालिक ने  इस लिए मकान से निकल दिया क्योंकि वो मकान का किराया नहीं दे पा रहे थे। आज स्वार्थी राजनीति एवं राजनीतिक लोगों को देखकर विश्वास नहीं होता कि राजनीति में  गुलजारी लाल नंदा जैसे भी लोग कभी थे। गुलजारी लाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 में पंजाब के सियाल कोट में हुआ था। उन्होंने लाहौर, आगरा एवं इलाहाबाद से अपनी शिक्षा पूरी की थी। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920 - 1921) श्रम संबंधी समस्याओं पर एक शोध अध्येता के रूप में कार्यरत रहे, नेशनल कॉलेज मुंबई में अर्थशास्त्र के अध्यापक बने। और इसी वर्ष वे असहयोग आंदोलन में शामिल हुए, 1922 में  वे अहमदाबाद टेक्सटाइल लेवर एसोसिएशन के सचिव बने, उन्हे 1932 में सत्याग्रह के लिए जेल जाना पड़ा। वह देश के बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर रहे। गुलजारीलाल नंदा भारत के पहले एवं मात्र कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे वे एक भारतीय राजनीतिक, शिक्षाविद एवं अर्थशास्त्री साहित्यकार थे। एक कार्यवाहक प्रधानमंत्री एक कैबिनेट मंत्री एवं सदस्य होता है अक्सर (वेस्ट मिनिस्टर प्रणाली वाले देशों में) जो ...