कुंभ मेले का पुण्य | अद्भुत कहानी
एक संत को एक अद्भुत सपना आया। सपने में सभी तीर्थों की महफिल सजी हुई थी। चर्चा गरम थी—इस कुंभ मेले में सबसे अधिक पुण्य किसने कमाया ? श्री प्रयागराज ने बड़ी विनम्रता से कहा , " इस बार सबसे अधिक पुण्य रामू मोची ने अर्जित किया है।" गंगा मैया को यह सुनकर हैरानी हुई। उन्होंने तपाक से पूछा , " रामू मोची ? लेकिन वह तो कभी गंगा स्नान के लिए यहां आया ही नहीं।" देवप्रयाग ने सहमति में सिर हिलाते हुए कहा , " हाँ , यहाँ भी नहीं आया था।" रुद्रप्रयाग ने भी हामी भरी , " बिलकुल , हमारे यहाँ भी उसका कोई नामो-निशान नहीं।" फिर भी श्री प्रयागराज अपनी बात पर डटे रहे। उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा , " सच यही है कि इस कुंभ के स्नान का सबसे अधिक पुण्य रामू मोची को ही मिला है।" यह सुनकर सभी तीर्थ चकित हो गए। उन्होंने उत्सुकता से पूछा , " आखिर रामू मोची कौन है ? वह कहाँ रहता है , और क्या करता है ?" श्री प्रयागराज ने मुस्कुराते हुए बताया , " वह रामू मोची केरल प्रदेश के दीवा गाँव में रहता है और जूते सिलाई का काम करता है।" सपना यहीं समाप्त हुआ , और स...