भगवान श्री राम के कोदंड धनुष का अद्भुत रहस्य

प्राचीन काल की बात है, जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ चुका था और राक्षसों का आतंक चारों ओर फैल गया था। ऐसे समय में भगवान श्री राम ने अपने पराक्रम और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया। उनके पास एक अद्भुत और दिव्य धनुष था, जिसे कोदंड कहा जाता था। इस धनुष का उल्लेख अनेक पुराणों और ग्रंथों में हुआ है, जो इसकी महिमा को दर्शाते हैं।


कोदंड धनुष का अद्भुत रहस्य
कहते हैं कि कोदंड धनुष भगवान श्री राम का सबसे प्रिय अस्त्र था। यह बांस से बना था, जिसकी लंबाई लगभग साढ़े पांच हाथ थी और इसका वज़न एक क्विंटल (100 किलो) था। इस धनुष से छूटा हुआ बाण तब तक नहीं लौटता था जब तक वह अपने लक्ष्य को भेद न दे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने इस धनुष को स्वयं बनाया था। दंडकारण्य वन में रहते हुए, उन्होंने इसे तैयार किया और असुरों का संहार किया। 

समुद्र सुखाने की कथा
जब भगवान श्री राम लंका की ओर बढ़ रहे थे, तो उन्हें समुद्र पार करना था। उन्होंने कोदंड धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और समुद्र को सुखाने का संकल्प लिया। उनकी शक्ति और क्रोध से भयभीत होकर वरुण देव प्रकट हुए और उनसे क्षमा याचना की। वरुण देव के निवेदन पर श्री राम ने अपने बाण का लक्ष्य बदल दिया और समुद्र को सुखाने से रोक दिया। यह घटना उनकी करुणा और पराक्रम का परिचायक है।

शिव धनुष पिनाक और शारंग धनुष की गाथा
रामायण की प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भगवान श्री राम ने शिव धनुष पिनाक को विवाह के समय तोड़ा था। यह धनुष महर्षि दधीचि की हड्डियों से बना था और इसका वज़न 21,000 किलो था। इसे तोड़कर उन्होंने अपनी अद्भुत शक्ति का प्रमाण दिया और सीता माता से विवाह किया। इसके बाद, भगवान परशुराम ने श्री राम को शारंग धनुष भेंट किया। यह उनकी महानता और धर्मनिष्ठा का सम्मान था।

रावण का विनाश और कोदंड का पराक्रम
लंका युद्ध में भगवान श्री राम ने कोदंड धनुष के माध्यम से रावण की विशाल सेना का विनाश किया। यह धनुष न केवल उनका अस्त्र था, बल्कि धर्म और न्याय का प्रतीक भी था। यही कारण है कि उन्हें कोदंडपानी (कोदंड का धारक) कहा जाता है। 

भगवान श्री राम की इस दिव्य गाथा में उनकी वीरता, दया और न्याय की झलक मिलती है। उनका कोदंड धनुष केवल एक अस्त्र नहीं था, बल्कि यह धर्म की विजय और अधर्म के विनाश का प्रतीक था।

जय जय श्री राम जी! 🚩

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