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नारी एक रूप अनेक - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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    मैं नारी हूँ कहते हैं जिसे लोग अबला  दुर्बला आश्रिता भयभीता  भयभीत इस समाज से भयभीत पुरूष के अत्याचार से  भयभीत लोकलाज से भयभीत लोकापवाद से  मैं नारी हूँ कहते हैं मुझे शालीनता की प्रतिमूर्ति  सहनशीला शान्तिप्रिया कर्तव्यपरायणा  निभाती हूँ अपना कर्तव्य अपने देश और समाज के प्रति  निभाती हूँ अपना कर्तव्य अपने वंश और परिवार के प्रति  मैं नारी हूँ कहते हैं मुझे लोग त्यागमयी  त्यागमयी तपस्विनी अभिलाषाविहीना  नष्ट कर देती हूँ अपनी आकांक्षाओं को उत्पन्न होने से पहले ही  कभी परिवार की सुख शान्ति के लिए  कभी उनके समृद्ध भविष्य के लिए  मैं नारी हूँ कहते हैं जिसे लोग प्रेरणा स्रोत  ज्ञानवती बुद्धिमती प्रेरणा का स्रोत  निर्भर करती है पुरूष की सफ़लता मेरी ही प्रेरणा पर  मैं उसके मन में ज्ञान का अलक जगाती हूँ  बनकर स्वयं उसकी प्रेरणा उसको सफल बनाती हूँ  मैं  नारी हूँ कहते हैं जिसे लोग ज्वालपुंज  दुर्गा काली चंडिका का विकराल रूप  असह्य हो जाता है जब अत्याचार  जग में बढ़ जाता है दुरा...

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से महिलाओं का उत्थान - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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भारत के संविधान का अनुच्छेद 44 जो 23 नवम्बर 1948 को लम्बी बहस के उपरान्त जोड़ा गया था इसमें कहा गया गया है कि भारत के सभी नागरिकों के लिए धर्म, क्षेत्र, लिंग, भाषा, आदि से ऊपर उठ कर समान नागरिक कानून लागू किया जाये, जिसका निर्देश संविाधान ने सरकार को दिया था। यदि भारत देश में समान नागरिक संहिता स्थापित हो जाती है तो उससे सबसे ज्यादा लाभ देश की 50 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं को मिलेगा जो स्वतंत्रता के 73 वर्ष व्यतीत जाने पर भी परतंत्रता व मजहबी आधीनता में अपना जीवन व्यतीत कर रही है। कुछ मजहबी कट्टरपंथी लोग समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को एक मजहब विशेष के विरुद्ध ही रेखांकित कर देते है। भारत का उच्चतम न्यायालय लम्बे समय से देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने की बात करता रहा है। भारत का संविधान देश के प्रत्येक धर्म व जाति के लोगों के समान अधिकार और कर्तव्य की बात करता है। क्या वे यह बता सकते है कि कितने मुस्लिम देशों या अन्य देशों में वहां प्रत्येक धर्म व मजहब के नागरिकों के लिए अलग अलग कानून है? कानून का कोई धर्म व मजहब नहीं होता है। फिर भारत जैसे देश में अलग अलग ध...

आओ नवजीवन की शुरूआत करें - By Montu Rajput (Bhopal)

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    आओ नवजीवन की शुरूआत करें कोरोना काल से सीखें और स्वीकार करें पूर्वजों से मिली विरासत संस्कृति का ध्यान करें अतिथि देवो भवः वाला फिर से शुरू सम्मान करें अतिथि का गृह प्रवेश से पहले हाथ जोड़ आदर सत्कार करें अतिथि भी अब जिम्मेदारी पर  अपनी-अपनी स्वीकृति प्रदान करें उतार चौखट पर ही पादुकायें तब घर में प्रस्थान करें फिर दें अतिथि को जल उनसे हाथ मुँह और चरणों का स्वच्छता का आह्वान करें आओ मिलकर मोन्टू हम और आप इतिहास से सीखें और नवजीवन की शुरूआत करें। ❋❋❋   मोन्टू राजपूत (भोपाल सिंह) कला सम्पादक-पुरुरवा मासिक पत्रिका नमन डिजिटल स्टूडियो एण्ड लैब, बिजनौर मो०: 9675084240 www.namanstudio.com