प्रसंग - ऐसे हैं हमारे बिहारी जी, ये किसी का कर्ज किसी के ऊपर नहीं रहने देते
एक बार की बात है, वृन्दावन में एक संत रहा करते थे। उनका नाम था कल्याण। वे बाँके बिहारी जी के परमभक्त थे। एक बार उनके पास एक सेठ आया। अब था तो सेठ लेकिन कुछ समय से उसका व्यापार ठीक नहीं चल रहा था। उसको व्यापार में बहुत नुकसान हो रहा था। अब वो सेठ उन संत के पास गया और उनको अपनी सारी व्यथा बताई और कहा महाराज आप कोई उपाय करिय। उन संत ने कहा, देखो अगर मैं कोई उपाय जानता तो तुम्हें अवश्य बता देता, मैं तो ऐसी कोई विद्या जानता नहीं जिससे मैं तेरे व्यापार को ठीक कर सकूं। ये मेरे बस में नहीं है, हमारे तो एक ही आश्रय हैं, बिहारी जी।
अब वो सेठ बिहारी जी से प्रार्थना करने लगा। दो चार दिन वृन्दावन में रुका फिर चला गया। कुछ समय बाद उसका सारा व्यापार धीरे-धीरे ठीक हो गया, फिर वो समय-समय पर वृन्दावन आने लगा बिहारी जी का धन्यवाद करता। फिर कुछ समय बाद वो थोड़ा अस्वस्थ हो गया, वृन्दावन आने की शक्ति भी शरीर में नहीं रही। लेकिन उसका एक जानकार एक बार वृन्दावन की यात्रा पर जा रहा था तो उसको बड़ी प्रसन्नता हुई कि ये बिहारी जी का दर्शन करने जा रहा है, तो उसने उसे कुछ सात सौ पचास रुपये दिए और कहा कि ये धन तू बिहारी जी की सेवा में लगा देना और उनको पोशाक धारण करवा देना।
अब वो भक्त जब वृन्दावन आया तो उसने बिहारी जी के लिए पोशाक बनवाई और उनको भोग भी लगवाया। लेकिन इन सब व्यवस्था में धन थोड़ा ज्यादा खर्च हो गया, लेकिन उस भक्त ने सोचा कि चलो कोई बात नहीं, थोड़ी सेवा बिहारी जी की हमसे बन गई कोई बात नहीं। लेकिन हमारे बिहारी जी तो बड़े नटखट हैं ही, अब इधर मंदिर बंद हुआ तो हमारे बिहारी जी रात को उस सेठ के स्वप्न में पहुँच गए।
अब सेठ स्वप्न में बिहारी जी की उस त्रिभुवन मोहिनी मुस्कान का दर्शन कर रहा है। उस सेठ को स्वप्न में ही बिहारी जी ने कहा, तुमने जो मेरे लिए सेवा भेजी थी वो मैंने स्वीकार की लेकिन उस सेवा में दो सौ उनचास रुपये ज्यादा लगे हैं। तुम उस भक्त को ये रुपया लौटा देना, ऐसा कहकर बिहारी जी अंतर्ध्यान हो गए। अब उस सेठ की जब आँख खुली तो वो आश्चर्य चकित रह गया कि ये कैसी लीला है बिहारी जी की। अब वो सेठ जल्द से जल्द उस भक्त के घर पहुंच गया तो उसको पता चला कि वो तो शाम को आयेंगे।
जब शाम को वो भक्त घर आया तो सेठ ने उसको सारी बात बताई तो वो भक्त आश्चर्य चकित रह गया कि ये बात तो मैं ही जानता था, और तो मैंने किसी को बताई भी नहीं। सेठ ने उनको वो दो सौ उनचास रुपये दिए और कहा, मेरे सपने में श्री बिहारी जी आए थे वो ही मुझे ये सब बात बता कर गए हैं। ये लीला देखकर वो भक्त खुशी से मुस्कुराने लगा, और बोला जय हो बिहारी जी की। इस कलयुग में भी बिहारी जी की ऐसी लीला। तो भक्तो ऐसे हैं हमारे बिहारी जी, ये किसी का कर्ज किसी के ऊपर नहीं रहने देते। जो एक बार इनकी शरण ले लेता है, फिर उसे किसी से कुछ माँगना नहीं पड़ता, उसको सब कुछ मिलता चला जाता है।

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