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ग़ज़ल - ए दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर | By Dr. Manju Jauhari 'Madhur'

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ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। ये काफिले तो जिंदगी में होंगे हर घड़ी, तू फिर से मुझे भूल न जाने की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। यादों के उजाले हैं वो यादों की बारातें, संग बैठ मेरे सपने सजाने की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। रिसते हुए जख्मों पे मेरे ना लगा मरहम छाले पड़े जो तेरे हैं तू उनकी बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। ये सच है साथ खाईं थी बचपन मैं रोटियाँ हाथों से माँ के खाए निवालों की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। रचनाकार: डॉ० मंजु जौहरी 'मधुर' 8851760946

सच्ची पूर्व दिशा और 21 जून का महत्व - BY हेमन्त कुमार

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उत्तर भारत में जिस तरफ हम उँगली करके कहते हैं कि यह पूर्व है वह वास्तविक पूर्व दिशा नहीं होती। दरअसल पूर्व दिशा ज्ञात करने के लिए हम उगते हुए सूरज को मानक मानते हैं। परंतु उत्तर भारत में सूरज पूर्व दिशा से दक्षिण की ओर हट कर उगता है। अब प्रश्न उठता है कि सच्ची पूर्व दिशा का कैसे पता चले। इसके लिए 21 जून का इंतजार करना पड़ता है और जाना पड़ता है कर्क रेखा पर। कर्क रेखा उत्तर भारत के सबसे नजदीक का वह बिंदुपथ है जहाँ 21 जून को सूर्य की किरणें धरती पर एकदम लंबवत पड़ती हैं। इस दिन कर्क रेखा पर सूर्य ठीक पूर्व में उगता है और ठीक पश्चिम में अस्त हो जाता है।  उज्जैन नगर कर्क रेखा पर ही बसा है और इसी वजह से प्राचीन भारत की खगोलीय गणनाओं का अनुसंधान स्थल रहा। महान भारतीय खगोलविद आर्यभट्ट ने उज्जैन में 21 जून के तत्सम्मत दिन पृथिवी के व्यास की गणना की थी। यह कैसे पता चला कि कर्क रेखा पर 21 जून को सूर्य की किरणें सीधी/लंबवत पड़ती हैं? यह ज्ञात हुआ गहरे कुँए से। कुआँ कितना ही गहरा क्यों न हो  कर्क रेखा पर बने कुँए में 21 जून की दोपहर को तली तक धूप पहुँच जाती है वह भी पूरी तली में। पूरी तली में ...