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एक विचारणीय प्रश्न By नीरज राजपूत

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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। एक प्रश्न के लिए मेरा विचार बहुत दिनों से मेरे मन में आ रहा था, परंतु समय के अभाव के चलते संभव नहीं हो पाया। आजकल शादी-ब्याह का सीजन भी शुरू हो चुका है और नए रिश्ते, सगाई अभी खूब हो रही हैं। मेरा प्रश्न लड़की वालों से यह है कि लड़के वालों द्वारा किसी वस्तु विशेष की मांग रखना जिस प्रकार से गलत है तो अपनी लड़की के लिए बहुत ज्यादा सैलरी वाले या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का देखना कहां तक सही है? आज के दौर में जमीन परिवारों में बंटवारे होने की वजह से लगातार कम हो रही तो किसके पास अधिक जमीन मिलेगी? कुछ मध्यमवर्गीय परिवारों में अच्छे सुंदर, सुशील और प्राइवेट जॉब करने वाले लड़के सिर्फ इसलिए ही अरेंज मैरिज नहीं कर पा रहे हैं कि जमीन बहुत कम है, रिश्ता कहां से आएगा? आधुनिक दौर में लड़कियां भी आजकल लव मैरिज को ही ज्यादा पसंद कर रही हैं तो हम किस मुंह से अपनी संस्कृति व को सभ्यता बचाने की बात कर रहे हैं? लड़के वाला दहेज मांगे तो गलत और लड़की वाला सरकारी नौकरी या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का ढूंढे तो सही? यह कैसी दोहरी मानसिकता हो गई है हम लोगों की? और रही बा...

ग़ज़ल : "बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है" - डॉ0 अशोक "गुलशन"

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बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है, अब न कोई आसरा है और सबकुछ ठीक है। हो गयीं बर्बाद फसलें पेड़ गायब हो गये, द्वार पर पानी भरा है और सबकुछ ठीक है। गाँव आने पर जो दिखता था मुझे हँसते हुये, आदमी वह  खो गया है और सबकुछ ठीक है। खाट  पर  बिस्तर  नहीं है और टूटी खाट है, आठ-दस घर ही गिरा है और सबकुछ ठीक है। मुँह घुमाकर बात मुझसे कर रहे सब लोग हैं, सूर्य पश्चिम से उगा है और सबकुछ ठीक है। काम पर निरहू गये हैं छः महीने बाद फ़िर, बाँझ को बच्चा हुआ है और सबकुछ ठीक है। गाय की  पूँजी  रही  जो  वो  दवाई ले गयी, रह गया बछड़ा बचा है और सबकुछ ठीक है। पेट की ख़ातिर चलो परदेश को 'गुलशन' चलें, बस यही इक रास्ता है और सबकुछ ठीक है।  डॉ0 अशोक "गुलशन " उत्तरी क़ानूनगोपुरा, बहराइच (उ0प्र0), पिन-271801