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रावण की मृत्यु के बाद माता सीता और शूर्पणखा का मिलन - क्या थी इसकी कहानी?

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रावण के अंत के बाद रामायण के कई संस्करणों और लोककथाओं में एक दिलचस्प प्रसंग का उल्लेख मिलता है—माता सीता और शूर्पणखा का मिलन। भले ही वाल्मीकि रामायण में इस घटना का स्पष्ट उल्लेख न हो, लेकिन लोक मान्यताओं और कुछ ग्रंथों में इसे विस्तार से बताया गया है। यह प्रसंग करुणा, पश्चाताप और सत्य के महत्व को समझने का एक गहरा उदाहरण है। 1. शूर्पणखा का क्रोध और दुख: बदले की आग रावण की मृत्यु और लंका के विनाश ने शूर्पणखा को गहरे दुःख में डुबो दिया। अपने प्रिय भाई की मौत के लिए वह माता सीता को जिम्मेदार मानती थी। शूर्पणखा का मानना था कि यदि सीता न होतीं, तो रावण का अहंकार भी न उभरता और न ही वह अपने विनाश का कारण बनता। अपने क्रोध और दुख से भरी शूर्पणखा सीता से बदला लेने के उद्देश्य से उनसे मिलने पहुंची। 2. सीता और शूर्पणखा का सामना: क्रोध बनाम करुणा माता सीता से मिलने पर शूर्पणखा ने उन्हें तीखे शब्दों में ललकारा। उसने पूछा, “क्या तुम जानती हो कि तुम्हारे कारण मेरे भाई का अंत हो गया?” लेकिन माता सीता ने शांति और करुणा से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “रावण ने अधर्म और अहंकार के मार्ग पर चलकर अपने विनाश को स्...

संविधान निर्माण हेतु हुआ था 22 समितियों का गठन - By Pavan Kumar Rajput

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22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद संविधान सभा ने संविधान निर्माण के कार्य को त्वरित गति से पूरा करने के लिए 22 समितियां का गठन किया था। भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिनके अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 में अपना काम पूरा कर लिया था और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ था, संविधान सभा की ड्राफ्टिंग, मशोदा, प्रारूप सभा का अध्यक्ष होने के नाते बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है,बाबा साहब को संविधान निर्माता,संविधान जनक, संविधान का राजा कहा जाता है। ड्राफ्टिंग सभा में 7 व्यक्ति थे। (1) अध्यक्ष - बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, (2) अल्लादी कृष्णा स्वामी अय्यर, (3) डॉ. के. एम. मुंशी, (4) सैयद मोहम्मद सादुल्ला, (5) एन गोपाल स्वामी अयंगर, (6) वी एल मित्तर, (7) डी.पी. खेतान थे। क्या आप जानते हैं ? संविधान के हर पन्ने पर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा का नाम लिखा हुआ है, पंडित जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने भारतीय संविधान अपनी कलम से लिखा था, जिसको लिखने में 6 महीने ...

सरल, सादगीपूर्ण, सकारात्मक व्यक्तित्व के धनी थे पूर्व प्रधान मंत्री गुलजारी लाल नंदा - By पवन कुमार 'माहियान'

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तीन बार कार्यवाहक प्रधान मंत्री पद पर रहे गुलजारी लाल नंदा को मकान मालिक ने  इस लिए मकान से निकल दिया क्योंकि वो मकान का किराया नहीं दे पा रहे थे। आज स्वार्थी राजनीति एवं राजनीतिक लोगों को देखकर विश्वास नहीं होता कि राजनीति में  गुलजारी लाल नंदा जैसे भी लोग कभी थे। गुलजारी लाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 में पंजाब के सियाल कोट में हुआ था। उन्होंने लाहौर, आगरा एवं इलाहाबाद से अपनी शिक्षा पूरी की थी। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920 - 1921) श्रम संबंधी समस्याओं पर एक शोध अध्येता के रूप में कार्यरत रहे, नेशनल कॉलेज मुंबई में अर्थशास्त्र के अध्यापक बने। और इसी वर्ष वे असहयोग आंदोलन में शामिल हुए, 1922 में  वे अहमदाबाद टेक्सटाइल लेवर एसोसिएशन के सचिव बने, उन्हे 1932 में सत्याग्रह के लिए जेल जाना पड़ा। वह देश के बहुत से महत्वपूर्ण पदों पर रहे। गुलजारीलाल नंदा भारत के पहले एवं मात्र कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे वे एक भारतीय राजनीतिक, शिक्षाविद एवं अर्थशास्त्री साहित्यकार थे। एक कार्यवाहक प्रधानमंत्री एक कैबिनेट मंत्री एवं सदस्य होता है अक्सर (वेस्ट मिनिस्टर प्रणाली वाले देशों में) जो ...

भगत सिंह - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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  खेतों में वो गोली बोना सिखा गया  पहन बसंती चोला मान हमारा बढ़ा गया  हिल गई बर्तानिया हुकुमत की चूंरें  मच गया हड़कम्प ब्रिटेन में पूरे  वो माँ का लाल तो आजादी का दीवाना था  बाकी सारा जग उसके लिए बेगाना था  थी दुल्हन आजा़दी उसकी, जीवन उसी पर वारा था  दुर्गा भाभी का वो देवर सबकी आखों का तारा था  संसद में बम फेंककर बहरों को आवाज़ सुना गया  चूहों जैसे दिल वाले अंग्रेजों को वो हिला गया  झूल गया फ़ाँसी पर फंदा अपना चूमकर  वो मतवाला जीना हमको सिखा गया झूमकर ।   मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)