भगत सिंह - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

 खेतों में वो गोली बोना सिखा गया 

पहन बसंती चोला मान हमारा बढ़ा गया 

हिल गई बर्तानिया हुकुमत की चूंरें 

मच गया हड़कम्प ब्रिटेन में पूरे 

वो माँ का लाल तो आजादी का दीवाना था 

बाकी सारा जग उसके लिए बेगाना था 

थी दुल्हन आजा़दी उसकी, जीवन उसी पर वारा था 

दुर्गा भाभी का वो देवर सबकी आखों का तारा था 

संसद में बम फेंककर बहरों को आवाज़ सुना गया 

चूहों जैसे दिल वाले अंग्रेजों को वो हिला गया 

झूल गया फ़ाँसी पर फंदा अपना चूमकर 

वो मतवाला जीना हमको सिखा गया झूमकर। 


मौलिक रचना:
दीप्ति मिश्रा

उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)

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