वही ठीक लगे घड़ी, जो व्यतीत हो गई - By Dr. Anil Sharma 'Anil', Dhampur, Bijnor (U.P.)

 पुरातन काल वाली, शिक्षाएं और संस्कृति,

संस्कारों सहित अब, रोजगार हो गई। 

शिक्षा की दुकानें सजी, शोरूम संस्कारों वाले

संस्कृति भी आजकल, तो व्यापार हो गई।

योग से निरोग वाले, पैकेज है बिक रहे 

सेवा त्याग भावनाएं, आधार ही खो गई।

कैसा भी करिए काम, पूरा लीजिएगा दाम 

आजकल नीति यही, तो संस्कार हो गई।

जीविका कमाने हित, काम सभी जन करें

गुरुकुल वाली प्रथा, कालातीत हो गई।

अब सब व्यवसाय, संस्कृति संस्कार शिक्षा 

सेवा भावना की बात, तो अतीत हो गई।

धर्म-कर्म व्यवसाय, कलाएं सभी व्यापार 

धन संग गाए जाने, वाले गीत हो गई।

अभी बदला समय, और भी यह बदलेगा 

वही ठीक लगे घड़ी, जो व्यतीत हो गई।


डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर, उत्तर प्रदेश

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