आलस किया, सफलता गयी - By Dr. Anil Sharma 'Anil', Dhampur, Bijnor (U.P.)

 विधा - छंद

शीर्षक - आलस किया, सफलता गयी


आलस को ज्ञानी जन, कहते रहे है शत्रु,

इससे किसी का कभी, कोई न हुआ भला।

काम टलते ही रहे, हाथ मलते ही रहे,

वक्त बीत गया जब, जोर न कोई  चला।

आलसी प्रवृत्ति वाले, हर एक काम टाले,

समय प्रबंधन की, जानते नहीं कला।

इसीलिए पछताते, सफलता नहीं पाते,

इन्होंने तो हर बार, बस हाथों को मला।।


जब भी आलस किया, सफलता गयी दूर,

आलस,सफलता की,शत्रुता पुरानी है।

सफलता चाहे श्रम, इसमें न पालें भ्रम,

आलस को छोड़ यदि, सफलता पानी है।

कर्म के बिना न कभी, मिलता किसी को कुछ

सतत कर्म ही बस, जीवन निशानी है।

आलस है मौत सम, इससे बचेंगे हम,

पग पग हो सफल, मन में ये ठानी है।।



डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल'

धामपुर, उत्तर प्रदेश

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