संदेश

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से महिलाओं का उत्थान - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

चित्र
भारत के संविधान का अनुच्छेद 44 जो 23 नवम्बर 1948 को लम्बी बहस के उपरान्त जोड़ा गया था इसमें कहा गया गया है कि भारत के सभी नागरिकों के लिए धर्म, क्षेत्र, लिंग, भाषा, आदि से ऊपर उठ कर समान नागरिक कानून लागू किया जाये, जिसका निर्देश संविाधान ने सरकार को दिया था। यदि भारत देश में समान नागरिक संहिता स्थापित हो जाती है तो उससे सबसे ज्यादा लाभ देश की 50 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं को मिलेगा जो स्वतंत्रता के 73 वर्ष व्यतीत जाने पर भी परतंत्रता व मजहबी आधीनता में अपना जीवन व्यतीत कर रही है। कुछ मजहबी कट्टरपंथी लोग समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को एक मजहब विशेष के विरुद्ध ही रेखांकित कर देते है। भारत का उच्चतम न्यायालय लम्बे समय से देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लाने की बात करता रहा है। भारत का संविधान देश के प्रत्येक धर्म व जाति के लोगों के समान अधिकार और कर्तव्य की बात करता है। क्या वे यह बता सकते है कि कितने मुस्लिम देशों या अन्य देशों में वहां प्रत्येक धर्म व मजहब के नागरिकों के लिए अलग अलग कानून है? कानून का कोई धर्म व मजहब नहीं होता है। फिर भारत जैसे देश में अलग अलग ध...

आओ नवजीवन की शुरूआत करें - By Montu Rajput (Bhopal)

चित्र
    आओ नवजीवन की शुरूआत करें कोरोना काल से सीखें और स्वीकार करें पूर्वजों से मिली विरासत संस्कृति का ध्यान करें अतिथि देवो भवः वाला फिर से शुरू सम्मान करें अतिथि का गृह प्रवेश से पहले हाथ जोड़ आदर सत्कार करें अतिथि भी अब जिम्मेदारी पर  अपनी-अपनी स्वीकृति प्रदान करें उतार चौखट पर ही पादुकायें तब घर में प्रस्थान करें फिर दें अतिथि को जल उनसे हाथ मुँह और चरणों का स्वच्छता का आह्वान करें आओ मिलकर मोन्टू हम और आप इतिहास से सीखें और नवजीवन की शुरूआत करें। ❋❋❋   मोन्टू राजपूत (भोपाल सिंह) कला सम्पादक-पुरुरवा मासिक पत्रिका नमन डिजिटल स्टूडियो एण्ड लैब, बिजनौर मो०: 9675084240 www.namanstudio.com

मंड़ल व कमंड़ल में राजनीति व राष्ट्रनीति का अंतर निहीत है - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

चित्र
वर्ष 1990 में मंड़ल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों को 27 प्रतिशत का आरक्षण देने के लिए एक राजनीतिक कदम उठाया क्योंकि तभी भाजपा के प्रमुख राजनेता लाल कृष्ण आड़वाणी ने आयोध्या में रामजन्म भूमि मंदिर के निर्माण के लिए गत कई दशकों से एक बहुत सोची समझी गई राष्ट्रनीति के तहत सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा का एक संकल्प लिया था। आड़वाणी की रथ यात्रा देश में राष्ट्र भावना को जागृत करते हुए सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सुत्र में पिरोने के लिए उठाया गया कदम था तथा यह एक राष्ट्रीय कार्य था क्योंकि यह महसूस किया जा रहा था कि जनमानस बाबरी ढ़ांचे को लेकर एक प्रकार की गुलाम व हीन भावना से गृस्त है। उसका तत्कालीन राजनीतिक महत्व नहीं था, न ही उससे भाजपा को रामजन्म भूमि मंदिर मन जाने से कोई राजनीतिक लाभ होता परन्तु भाजपा के इस अभियान को जिस प्रकार विपक्ष ने मुद्दा बनाया जिससे उनकी राजनीतिक कुर्सी हिलती सी लगी तो उन्होंने कुर्सी बचाने व अपने अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए केन्द्र सरकार के संकेत पर 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में...

नारी - By नीमा शर्मा ‘हँसमुख’ Neema Sharma 'Hansmukh', Najibabad

चित्र
  वो चिता सी जली रात भर रात भर वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक। जिम्मेदारी की लकड़ी  लगाये हुए कांधे पर बोझ सबका उठाये हुए अपनी आशाओं का  घृत चढ़ाए हुए वो तो जलती रही रात भर रात भर। संस्कारो की चादर को ओढ़े हुए पुष्प की भांति वो मुस्कुरती रही शाम ढलते ही वो मुरझाती रही वो चिता सी जली रात भर रात भर वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक। कुंभ आँखो का मेरी छलकने लगा पीड़ा के छिद्र से वो छलकने लगा वो छलकती रही रात भर रात भर वो चिता सी जली................। उसका तन मन समर्पित समाहित हुआ परिवार को मेरे परिवार को  कल्पनाओं के कुंड में प्रवाहित हुआ वो तो बहती रही राख राख बन वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक वो चिता सी जली रात भर रात भर।। नीमा शर्मा 'हँसमुख' नजीबाबाद,  बिजनौर (उ०प्र०)  

एक विचारणीय प्रश्न By नीरज राजपूत

चित्र
सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। एक प्रश्न के लिए मेरा विचार बहुत दिनों से मेरे मन में आ रहा था, परंतु समय के अभाव के चलते संभव नहीं हो पाया। आजकल शादी-ब्याह का सीजन भी शुरू हो चुका है और नए रिश्ते, सगाई अभी खूब हो रही हैं। मेरा प्रश्न लड़की वालों से यह है कि लड़के वालों द्वारा किसी वस्तु विशेष की मांग रखना जिस प्रकार से गलत है तो अपनी लड़की के लिए बहुत ज्यादा सैलरी वाले या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का देखना कहां तक सही है? आज के दौर में जमीन परिवारों में बंटवारे होने की वजह से लगातार कम हो रही तो किसके पास अधिक जमीन मिलेगी? कुछ मध्यमवर्गीय परिवारों में अच्छे सुंदर, सुशील और प्राइवेट जॉब करने वाले लड़के सिर्फ इसलिए ही अरेंज मैरिज नहीं कर पा रहे हैं कि जमीन बहुत कम है, रिश्ता कहां से आएगा? आधुनिक दौर में लड़कियां भी आजकल लव मैरिज को ही ज्यादा पसंद कर रही हैं तो हम किस मुंह से अपनी संस्कृति व को सभ्यता बचाने की बात कर रहे हैं? लड़के वाला दहेज मांगे तो गलत और लड़की वाला सरकारी नौकरी या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का ढूंढे तो सही? यह कैसी दोहरी मानसिकता हो गई है हम लोगों की? और रही बा...

ग़ज़ल : "बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है" - डॉ0 अशोक "गुलशन"

चित्र
बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है, अब न कोई आसरा है और सबकुछ ठीक है। हो गयीं बर्बाद फसलें पेड़ गायब हो गये, द्वार पर पानी भरा है और सबकुछ ठीक है। गाँव आने पर जो दिखता था मुझे हँसते हुये, आदमी वह  खो गया है और सबकुछ ठीक है। खाट  पर  बिस्तर  नहीं है और टूटी खाट है, आठ-दस घर ही गिरा है और सबकुछ ठीक है। मुँह घुमाकर बात मुझसे कर रहे सब लोग हैं, सूर्य पश्चिम से उगा है और सबकुछ ठीक है। काम पर निरहू गये हैं छः महीने बाद फ़िर, बाँझ को बच्चा हुआ है और सबकुछ ठीक है। गाय की  पूँजी  रही  जो  वो  दवाई ले गयी, रह गया बछड़ा बचा है और सबकुछ ठीक है। पेट की ख़ातिर चलो परदेश को 'गुलशन' चलें, बस यही इक रास्ता है और सबकुछ ठीक है।  डॉ0 अशोक "गुलशन " उत्तरी क़ानूनगोपुरा, बहराइच (उ0प्र0), पिन-271801

भगत सिंह - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

चित्र
  खेतों में वो गोली बोना सिखा गया  पहन बसंती चोला मान हमारा बढ़ा गया  हिल गई बर्तानिया हुकुमत की चूंरें  मच गया हड़कम्प ब्रिटेन में पूरे  वो माँ का लाल तो आजादी का दीवाना था  बाकी सारा जग उसके लिए बेगाना था  थी दुल्हन आजा़दी उसकी, जीवन उसी पर वारा था  दुर्गा भाभी का वो देवर सबकी आखों का तारा था  संसद में बम फेंककर बहरों को आवाज़ सुना गया  चूहों जैसे दिल वाले अंग्रेजों को वो हिला गया  झूल गया फ़ाँसी पर फंदा अपना चूमकर  वो मतवाला जीना हमको सिखा गया झूमकर ।   मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)