जीवन बाँसुरी - By Anita Tomar 'Anupama'


छींके की मटकी में राधा ने,
धर लुकाई कान्हा की मुरली,
राधा जानत है कान्हा को,
ढूँढेगा वो उसे चहुँ ओर।
उसकी तड़प में छान मारेगा,
गोकुल का हर इक छोर।

चोरी की तड़प क्या होती है?
आज कान्हा को यह बताना है,
राधा ने तो बस चुराई है बाँसुरी
माखन नहीं वो तो है चित्तचोर
ये बात जाने सारा जमाना है।

कान्हा भाँप गया राधा की मंशा
बोला राधा से चाहे जो सजा दो,
पर इतना कहता हूँ आज मैं तुमसे
तुम ही तो मेरी जीवन बाँसुरी हो।

 अनिता तोमर ‘अनुपमा’
(स्वरचित एवं मौलिक रचना)


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रसंग - मन चंगा तो कठौती में गंगा

आओ नवजीवन की शुरूआत करें - By Montu Rajput (Bhopal)

भगवान विष्णु के दसवें 'कल्कि' अवतार: अधर्म (कलयुग) का अंत और सत्ययुग की शुरुआत