तुष्टीकरण के लिए सीएए पर कांग्रेस अपने पूर्वजों को भी नकार रही है - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

वर्तमान में जिस प्रकार जमीन पर लेटी कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक की बैशाखी के सहारे पुनः खड़ा होने की कोशिश कर रही है उसकी यह कोशिश कितनी सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। भाजपा सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून जिस प्रकार राज्यसभा व लोकसभा में पारित करवा लिया, उससे झल्लाये विपक्ष ने एक जुट होकर भाजपा को निशाने पर ले लिया तथा सम्पूर्ण देश को ही लाक्षाग्रह में बदल दिया तथा राष्ट्रहित को ताक पर रख दिया। भारत के प्रतिष्ठित तीन विश्वविद्यालय के छात्रों को हथियार बनाकर देश के मुसलमानों में भ्रम, भय तथा आतंक का माहौल बना दिया गया।

मुसलमानों को यह समझाया गया कि अगर भाजपा इसी प्रकार तीन तलाक, राम जन्म भूमि, अनुच्छेद 370 पर सफल होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब वह समान नागरिक संहिता को लागू कराकर जनसंख्या नियंत्रण कानून को भी पारित करा लेगी, जिससे जो मुसलमान यह सपना देख रहा है कि वह चार शादी करके व 20-25 बच्चे पैदा करके उसकी आबादी यदि भारत की कुल आबादी से आधी से ज्यादा हो जाय तो वह भारत को शरीयत के कानून पर चला पाने के योग्य करके भारत को एक मुस्लिम राष्ट्र घोषित करवा देगी। भाजपा के इन कार्यों से मुसलमानों का सपना टूटता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने हिन्दुओं को तो प्याज, पैट्रोल, गन्ना इत्यादि की राजनीति में ही व्यस्त कर दिया है। कांग्रेस ने कभी संसद में बेरोजगारी, मंहगाई, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचे पर कोई सरगर्भित बहस की माँग नहीं की है। परन्तु कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी व उनकी बहन प्रियंका वाड्रा ने नागरिक संशोधन कानून व एनआरसी को एकीकृत करते हुए मुसलमानों को साधने की कोशिश की है। इसी कोशिश में वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (जिन पर भारत के करदाताओं के सैकडों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष व्यय होते हैं) में छात्रों को सीएए व एनआरसी के विरोध में दिनरात एक करके सम्पूर्ण विपक्षी दलों को एक छतरी के नीचे लाने की एक असफल कोशिश कर रहे है। काँग्रेस यह झुठला रही है कि महात्मा गाँधी, पं० जवाहर लाल नेहरु, डाॅ० मनमोहन सिंह, तथा प्रवण मुखर्जी ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक जिनको प्रताड़ित किया जा रहा है, वे यदि शरणार्थी बनकर भारत में आ रहे हैं तो उनकी चिन्ता भी की जाये। पाकिस्तान के लियाकत अली व भारत के पं० जवाहर लाल नेहरु के बीच हुआ समझौता पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को लेकर ही था। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक 23 प्रतिशत थे जो अब घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रहे हैं। जो बचे हैं उन्हें भी प्रतिदिन मुसलमानों से पीड़ित होना पड़ रहा है। जो मुसलमान पाकिस्तान व बाद में बना बांग्लादेश व अफगानिस्तान से भारत में आ रहे हैं, वे किसी प्रताड़ना के शिकार होकर नहीं अपितु वे रोजगार के लिए भारत में आ रहे हैं। महात्मा गाँधी व कांग्रेस के नेताओं के द्वारा पाकिस्तान व बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता का समर्थन किया था। परन्तु वर्तमान में मतदाताओं में न्यून होती कांग्रेस अन्य गैर भाजपा व विपक्षी दलों को एकत्र करके किसी न किसी प्रकार सत्ता में पुनः आना चाह रही है। राकापा के नेता शरद पवार व झारखंड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा वामपंथी, एलजेडी, आरएलएसपी, राजद इत्यादि ही साथ खडे़ हैं। जबकि कु० ममता बनर्जी, कु० मायावती तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अभी दोराहे पर खडे़ नजर आते हैं। एक तरफ उनका मुस्लिम वोट बैंक है तो दूसरी तरफ बहुसंख्य हिन्दुओं को भी वे नजरान्दाज नहीं कर सकते हैं।

शिवसेना की दुर्गति तब से होनी शुरु हो गयी है जब से उसने महाराष्ट्र में भाजपा के साथ चुनाव लड़कर और फिर भाजपा को धोखा देकर रांकापा व कांग्रेस से गठजोड़ करके स्वंय को उनके हाथों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए बेच दिया था। शिवसेना सीएए पर असमन्जस्य की स्थिति में है। राजस्थान व मध्यप्रदेश, केरल, प० बंगाल, झारखंड,  छत्तीसगढ़, पंजाब इत्यादि कांग्रेस के समर्थित राज्य सीएए का विरोध कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ० मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में घुसपैठियों की समस्या पर चिन्ता जाहिर की थी तथा 2003 में प्रणव मुखर्जी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नागरिकता बांग्लादेश से आए केवल अल्पसंख्यक शरणार्थियों को ही दी जाये, वहाँ के बहुसंख्यकों को नहीं। इस संसदीय समिति में हंसराज भारद्वाज, मोती लाल वोरा, कपिल सिब्बल, जनेश्वर मिश्र, लालू प्रसाद यादव, राम जेठमलानी सहित कई सांसद थे। यह समिति एक राजनीतिक दल के सदस्यों की नहीं थी। अपितु संसदीय समिति थी जिसमें कई राजनीतिक दलों के सांसद थे। वर्तमान सरकार ने तो तभी का रुका हुआ कार्य पूर्ण किया है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहलु गाँधी जिस प्रकार राॅफेल के मुद्दे पर निरन्तर प्रधानमंत्री को चोर बताते रहे जबकि उच्चतम न्यायालय ने भी प्रधानमंत्री के पक्ष में अपना फैसला दिया था परन्तु राहुल गाँधी निरन्तर अपना चुनाव अभियान राॅफेल के झूठे मुद्दे पर ही चलाते रहे। अब उन्हें यह महसूस हो रहा है कि अगर नरेन्द्र मोदी संविधान में वांछित समान नागरिक संहिता तथा जनसंख्या नियंत्रण पर कोई कानून संसद में पारित करवाने में सफल रहते हैं तो कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों की राजनीति ही खटाई में पड़ जायेगी। एलजेडी के शरद यादव, आरएलएसपी के उपेन्द्र कुशवाहा लोकसभा में एक सीट भी प्राप्त नहीं कर सके हैं। वामपंथी भी जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली व केरल तक में ही सिमट कर रह गये है। ममता बनर्जी की सरकार घुसपैठियों के ही सहारे चल रही है। जबकि स्वयं ममता बनर्जी घुसपैठियों पर अंकुश लगाने के लिए 2005 में लोकसभा में मांग कर चुकी थी। आम आदमी पार्टी भी कांगे्रस से दूरी बना कर चल रही है। परन्तु कांग्रेस के राहुल गाँधी व उनकी बहन को लगता है कि जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के वामपंथी समर्थक छात्रों को इस मुद्दे पर भड़काया जा सकता है। सो अब कांग्रेस के द्वारा लीड लेने की कोशिश की जा रही है। देश में मात्र तीन विश्वविद्यालयों के छात्रों को ही भारत नहीं माना जा सकता है। राहुल गांधी यह कहते नहीं थक रहे हैं कि पीएम मोदी में यह साहस नहीं है कि वे छात्रों का सामना कर सकें। कांग्रेस के द्वारा समर्थित यह छात्रों का तथाकथित आंदोलन देश में यह साफ है कि आर्थिक हालात और बेरोजगारी की समस्या से युवाओं में गुस्सा व डर नहीं है तथा युवाओं को अपना भविष्य मात्र सीएए व एनआरसी में ही नजर आता है जबकि उनका सीएए व एनआरसी से कोई लेना देना नहीं है। इससे तो वे अपना भविष्य ही अंधाकरमय बना रहे है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल क्यों भूल जाते है कि जो छात्र शांति को छोड़ कर पत्थर उठा कर पुलिस पर वार करते हैं तथा पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाते हैं तो वे देशद्रोही की श्रेणी में क्यों नहीं रखे जा सकते। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री तथा अनेक मंत्री व सांसद यह बार बार कह रहे हैं कि सीएए में किसी की नागरिकता नहीं छीनी जायेगी। पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक जो धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत में 31 दिसम्बर 2014 तक भाग आये हैं, उनको छः वर्ष में नागरिकता दे दी जायेगी वे भारत के अलावा अन्य किसी देश में जा ही नहीं सकते हैं। जबकि जो मुस्लिम हैं वे किसी भी 56 मुस्लिम राष्ट्र में जाकर वहाँं कि नागरिकता आसानी से ले सकते हैं तथा भारत में वे नियमानुसार नागरिकता ग्यारह वर्ष के अपने निवास के अनुसार ले सकते हैं। विश्व में कोई भी ऐसा देश नहीं है जहाँ उनका अपना-अपना एनआरसी नहीं हो परन्तु भारत में ही इसकी मांग समय-समय पर उठती रही है तो फिर भारत में भी एनआरसी क्यों न लागू कर दिया जाये। प्रधानमंत्री के अनुसार अभी एनआरसी पर कोई कार्य शुरु ही नहीं हुआ है। जब इसका ड्राफ्ट तैयार होगा तब देखा जायेगा। तीन तलाक से चिढ़े हुए व समान नागरिक संहिता व जनसंख्या नियंत्रण की आशंका से चिन्तित मुल्ला, मौलवी व कट्टरपंथी मौलाना मुसलमानों को यह समझा रहे हैं कि भाजपा की सरकार उनको गैर नागरिक बना कर देश से बाहर कर देगी जबकि देश से बाहर तो मात्र घुसपैठिये ही जायेंगे जो चोरी छुपे भारत में घुस आये हैं तथा यहाँ के संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और यह जनसंख्या की समस्या व अराजकता व कानूनी शासन सीमित करने में समस्या खड़ी कर रहे हैं। प्रत्येक देश अपने नागरिकता के नियम निश्चित करता है परन्तु विपक्षी दल इसको मुस्लिम तुष्टीकरण के चश्मे से ही देख रहे हैं तथा वे तनिक यह नहीं सोच रहे कि उनकी इस विघटनकारी राजनीति का देश की अंखडता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? विपक्ष के द्वारा मात्र राजनीति करते हुए ही एनआरसी व सीएए का विरोध किया जा रहा है जिसका बहुत ही दुखद परिणाम भारत की आने वाली पीढ़ियाँ देखेंगी। विपक्ष यह बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहा है। भारत को प्रत्येक किसी भी विदेशाी के लिए धर्मशाला बनने से रोकना ही होगा। वामपंथी इस्लामिस्ट तत्वों से कह रहे हैं कि सीएए विरोध प्रदर्शनों में अपनी धार्मिक पहचान को जाहिर न करें क्योंकि इससे उन्हें हिन्दू दक्षिणपंथियों पर हमला करना मुश्किल होगा जबकि अमेरिका, ब्रिटेन और भारत में सभी जानते हैं कि आज वामपंथ दक्षिणपंथ में परिवर्तित हो गया है।

सीएए संसद से पारित होने वाला कानून है। इसे लागू करने से इंकार करने वाले राज्य स्वतः ही अनुच्छेद 356 के दायरे में आ जायेगें और बर्खास्तगी की स्थिति में पहुँच जायेंगे जबकि एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश व निर्देश में आसाम में ही शुरु की गई है।


डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल
44 आदर्श काॅलोनी
मुजफ्फरनगर 251001 (उoप्रo)


डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल सनातन धर्म महाविद्यालय, मुजफ्फरनगर (उoप्रo), के वाणिज्य संकाय के संकायाध्यक्ष व ऐसोसियेट प्रोफेसर के पद से व महाविद्यालय के प्राचार्य पद से अवकाश प्राप्त हैं तथा स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार हैं।


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