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ख़ामोशी एक जरिया है दिल की बात छुपाने का - By Kamendra Kumar Rajput 'KKR'

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ख़ामोशी एक जरिया है दिल की बात छुपाने का क्या फायदा बे वजह मुस्कुराने का? हमारे गम में भी लोग खुशी ढूँढते हैं क्या फायदा है? अब हर शख्स को आजमाने का, शिकायत है मुझे ख़ुद से  कि मैं खुद को खुश ना रख पाया, अपनी हर गलती पर दोष बताता रह गया इस जमाने का इस जमाने के दोष पर, सजा देता मैं अगर, तो शायद खुद को खुश रख पाता नाम बदनाम ना होता मेरे आशियाने का  लेकिन मैं ख़ामोश हूँ क्योंकि... खामोशी एक दरिया है दिल की बात छुपाने का -: स्वरचित:-   कामेंद्र राजपूत,  चंडीगढ़  (Founder-Ganvveg)

तुष्टीकरण के लिए सीएए पर कांग्रेस अपने पूर्वजों को भी नकार रही है - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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वर्तमान में जिस प्रकार जमीन पर लेटी कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक की बैशाखी के सहारे पुनः खड़ा होने की कोशिश कर रही है उसकी यह कोशिश कितनी सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। भाजपा सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून जिस प्रकार राज्यसभा व लोकसभा में पारित करवा लिया, उससे झल्लाये विपक्ष ने एक जुट होकर भाजपा को निशाने पर ले लिया तथा सम्पूर्ण देश को ही लाक्षाग्रह में बदल दिया तथा राष्ट्रहित को ताक पर रख दिया। भारत के प्रतिष्ठित तीन विश्वविद्यालय के छात्रों को हथियार बनाकर देश के मुसलमानों में भ्रम, भय तथा आतंक का माहौल बना दिया गया। मुसलमानों को यह समझाया गया कि अगर भाजपा इसी प्रकार तीन तलाक, राम जन्म भूमि, अनुच्छेद 370 पर सफल होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब वह समान नागरिक संहिता को लागू कराकर जनसंख्या नियंत्रण कानून को भी पारित करा लेगी, जिससे जो मुसलमान यह सपना देख रहा है कि वह चार शादी करके व 20-25 बच्चे पैदा करके उसकी आबादी यदि भारत की कुल आबादी से आधी से ज्यादा हो जाय तो वह भारत को शरीयत के कानून पर चला पाने के योग्य करके भारत को एक मुस्लिम राष्ट्र घोषित करवा देगी। भाजपा के इन कार...

जीवन बाँसुरी - By Anita Tomar 'Anupama'

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छींके की मटकी में राधा ने, धर लुकाई कान्हा की मुरली, राधा जानत है कान्हा को, ढूँढेगा वो उसे चहुँ ओर। उसकी तड़प में छान मारेगा, गोकुल का हर इक छोर। चोरी की तड़प क्या होती है? आज कान्हा को यह बताना है, राधा ने तो बस चुराई है बाँसुरी माखन नहीं वो तो है चित्तचोर ये बात जाने सारा जमाना है। कान्हा भाँप गया राधा की मंशा बोला राधा से चाहे जो सजा दो, पर इतना कहता हूँ आज मैं तुमसे तुम ही तो मेरी जीवन बाँसुरी हो।   अनिता तोमर ‘अनुपमा’ ( स्वरचित एवं मौलिक रचना)

ना चाहूँ तिरंगा कफ़न के लिए - By Hiten Pratap Singh 'Tadap'

स्वच्छ भोजन कहाँ? स्वस्थ तन के लिए, अब नहीं साफ हवा, स्वस्थ मन के लिए। बाप की सैकड़ों डाँट, थी अमृत कभी, अब एक डाँट भारी, क्यूँ जीवन के लिए? बल भुजाओं में हो, कुशल रण के लिए, आत्म बल दिल में हो, निज प्रण के लिए। तूने जीवन दिया, तुझको अर्पण है ये, संग तेरे मैं सदा, हर क्षण के लिए।। रोशनी क्यूँ जले, एक किरण के लिए, उपवन क्यों खिले, एक सुमन के लिए। मैं तो चाहता हूँ, जिंदगी चार दिन, दो कलम के लिए, दो वतन के लिए।। हाथ जब भी उठे, तेरे नमन के लिए, खाद तन का बने, देश चमन के लिए। मैं मरूँ तो तिरंगा, लहराता रहे, तिरंगा ना चाहे, ‘हितेन’ कफन के लिए।। हितेन प्रताप सिंह ‘तड़प’ न्यू मीनाक्षी पुरम, मेरठ मो० 7906992199

देश की अखंडता के लिए समान नागरिक संहिता (सीसीसी) एक संवैधानिक आवश्यकता - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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वर्तमान में जो लोग नागरिक संशोधन कानून (सीएए), एनआरसी तथा एनपीआर का समर्थन कर रहे हैं, वे संविधान की दुहाई दे रहे हैं। जबकि इनका विरोध करने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 की आड़ लेकर उसका विरोध कर रहे हैं। वे शायद यह भूल जाते हैं कि भारत में नागरिकता प्राप्त करना उतना ही दुश्वर तथा कठिन होना चाहिए जितना कि यूरोप इत्यादि के किसी अन्य देश में होता है। भारत के एक-एक नागरिक का रिकाॅर्ड भारत सरकार के पास होना ही चाहिए। भारत को कभी भी भावनाओं में बहकर अपनी सीमाऐं किसी के लिए भी नहीं खोल देनी चाहिए, क्योंकि ऐसे अनाधिकृत घुसपैठिये लोग भारत में रह कर भारत की जड़ को ही खोखला कर देते हैं। इन सब की ऊहांपोह में हम एक बात भूल जाते हैं कि देश की संविधान सभा ने 23 नवम्बर 1948 को विस्तृत चर्चा के उपरान्त अनुच्छेद 44 को जोड़ा था तथा स्वतंत्र हुए भारत की सरकार को निर्देश दिया था कि देश के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (सीसीसी) लागू होनी चाहिए। संविधान की मूल भावना भी यही है कि भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति से किसी भी प्रकार का भेदभाव क्षेत्र, भाषा, लिंग, अर्थ, धर्म इत्यादि के आधार पर ...

भारत माता की वन्दना - Compilation by Dr. Nisha Agarwal

हिम-कण सी निर्मल और उज्जवल, गौरवान्वित भारती प्रणाम। तेरे ही प्रसाद से पूरित, संस्कृति का कल्याण धाम।। जन-जन के अधरों तक पहुँचे, तेरा अमृतमय सन्देश। श्रेष्ठ भावना सतत् साधना, का चमके शीत राकेश। हिम-कण सी निर्मल और उज्जवल, गौरवान्वित भारती प्रणाम। तेरे ही प्रसाद से पूरित, संस्कृति का कल्याण धाम।। जीवन को प्रकाशमय कर दे, उमड़ उठे श्रद्धा का सागर। सत्य वीरता और विवेकी, धुल जाये मानस प्रत्येक। हिम-कण सी निर्मल और उज्जवल। गौरवान्वित भारती प्रणाम।। तेरे ही प्रसाद से पूरित। संस्कृति का कल्याण धाम।। संकलनकर्ता: डाॅ० निशा अग्रवाल एसोसिएट प्रोफेसर (वाणिज्य विभाग) एस०डी० (पी०जी०) काॅलेज, मुजजफ्फरनगर।

धर्म परिवर्तन क्यों? - By Neeraj Rajput

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आज संसार में सबसे ज्यादा जो चर्चा में रहता है, वह है धर्म। धर्म के कारण ही आज सबसे ज्यादा खून-खराबा, लड़ाई-झगड़े, दंगे-फसाद आदि देखने में आते हैं। वैसे तो हम गाते हैं कि ‘‘मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना’’ , परंतु मजहब की वजह से ही आज सब कुछ विपरीत देखने में आता है। क्योंकि लोगों ने धर्म को समझा ही नहीं कि धर्म क्या है? लोगों ने धर्म को मन्नत माँगने तथा अपने पूर्वजों, महापुरुषों के जीवन-चरित्रों की अपने मन मुताबिक व्याख्या करना मात्र बना लिया है। अब हम अपनी वास्तविक चर्चा पर आते हैं कि धर्म परिवर्तन हो क्यों रहा है? महर्षि मनु कहते हैं धर्मः एव हतो हन्ति, धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद् धर्मो न हन्तव्यो, मा नो धर्मो हतोऽवर्धितः।। अर्थात मरा हुआ या त्यागा हुआ धर्म मनुष्य को मारता है और धर्म की रक्षा करने पर वह हमारी रक्षा करता है। इसलिए पहले धर्म को समझे और किसी भी अवस्था में धर्म नहीं मारना व त्यागना चाहिए। भारत को एक मत निरपेक्ष राष्ट्र माना जा सकता है, किंतु धर्मनिरपेक्ष नहीं। क्योंकि धर्म तो सभी मानवों का एक ही होता है। जिस प्रकार परमात्मा के बनाए सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी आद...