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ईश्वर भक्ति भजन - By धर्मवीर राजपूत (दीप फोटो स्टूडियो)

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बुरे काम छोड़, रब से नाता जोड़, तुझे शांति मिलेगी सुबह शाम, बुरे काम छोड़ ..................................। कहता है बंदे तू नींद नहीं आती, आये भी कैसे दिल से ईष्र्या नहीं जाती, तूने दुखियों को सताया है तमाम, बुरे काम छोड़ ..................................। जायेगा प्राणी एक दिन जग से अकेला, तेरा ये तन है बंदे मिट्टी का ढेला, तेरी चमड़ी का कुछ नहीं दाम, बुरे काम छोड़ ..................................। कहते हैं ज्ञानी तुमसे अनुभव जग का, काम करो ऐसे जिससे भला होवे सबका, ‘‘धरम’’ रास्ता बताये है आसान, बुरे काम छोड़ ..................................। स्वरचित: धर्मवीर राजपूत दीप फोटो स्टूडियो, किरतपुर

लॉकडाउन 3.0 - By धर्मवीर राजपूत (दीप फोटो स्टूडियो)

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महामारी है ये कोरोना, ऐ इंसान सब अपने घर में रहो ना। जो डाॅक्टर, पुलिस तेरी करते हिफाजत, तुम शैतान बनके करो ना शरारत। बन के आये जो ये फरिश्ते, ऐ नादान तुम इन पे वार करो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। जो सरकार की बात तुमने ना मानी, फिर दिक्कत सभी को पड़ेगी उठानी। हम सबको है भारत बचाना, इसलिये आपस में तुम लड़ो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। जो कहते हैं मोदी, निश्चित जीत होगी, है विश्वास हमको, विजय टीम होगी। भागेगा ये इक दिन कोरोना, ऐ जवान तुम बिल्कुल भी डरो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। स्वरचित: धर्मवीर राजपूत दीप फोटो स्टूडियो, किरतपुर

मजबूर मजदूर - By नीमा शर्मा 'हँसमुख' जी, नजीबाबाद

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कंधे पर बोझ लिए चलता रहा पथ पर। फैला चारों और सन्नाटा, मीलों का सफर। अनसुलझी गुत्थी सुलझाता चला जा रहा मैं पथ पर। महामारी का डर, फिर भी निडर। अपनों से मिलने की चाह चला हूँ मैं पथरीली राह। थके पाँव, लगे कई घाव। भूख है प्यास है, मंजिल की आस है। मैं पहुँचूँगा या नहीं, यही डर मन में लिए। आगे बढ़ता जा रहा हूँ मैं, चलता जा रहा हूँ मैं। अपने घर अपने गाँव, जहाँ मिलेगी अपनो की छाँव। मै मजदूर हूँ, मजबूर हूँ। झेल रहा महामारी का वार, चला हूँ अपनों का पाने प्यार। मै मजदूर हूँ, मजबूर हूँ। नीमा शर्मा 'हँसमुख' जी, नजीबाबाद (बिजनौर)

जिक्र है फ़िक्र है - By स्वo रामवीर सिंह राजपूत Rv Singh Rajput (10-04-2014)

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जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में। आग है कभी, कभी धुआं सा उठे, खलिश ये हवाओं की, सब कुछ कहे, उम्मीदों की बारिशें, भीग जाने की कोशिशें, ठंडक है फिज़ा की हर एक लहर में, जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में ।।1।। ख्वाब हैं बंधे बंधे, लब हैं सिले हुए, दिल बेचारा कब तक, सब कुछ सहे, लोक लाज की बंदिशें, बिखर जाने साजिशें, बेचैनी है धड़कन के हर ठहर में, जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में ।।2।। स्वरचित: रामवीर सिंह राजपूत

महामारियों ने बदला है इतिहास | By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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वर्तमान में नवम्बर - दिसम्बर 2019 से चीन के वुहान शहर से शुरु हुई नोवेल कौरोना वायरस से उत्पन्न महामारी कोविद-19 ने सम्पूर्ण विश्व के 205 देशों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। कोविद-19 महामारी का अभी तक कोई ईलाज चिकित्सक वै ज्ञानिक  नहीं  खोज पाये है। बस मरीजों को तथा सामान्य जनता को यही बताया जा रहा है कि अपने शरीर में वायरसों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी पावर) को बढ़ायें और उसको ही बढ़ाने की कोशिशें हो रही है। इस महामारी में मरीज के फेफड़ों को वायरस के द्वारा जकड़ लिया जाता है तथा सांस अवरुद्ध होने से मरीज तड़फ तड़फ कर अपनी जान दे देता है। मरीज से वायरस का संक्रमरण दूसरे स्वस्थ्य लोगों को मरीज की सांस व सक्रंमित हाथों से लग जाता है जिससे वह भी 10-14 दिन में कोविद-19 का शिकार हो जाता है। इससे पूर्व भी विश्व में हैजा, पोलियों, प्लेग, कालरा, फ्लू, मलेरिया इत्यादि महामारियों ने मुनष्य के जीवन को खतरे में ड़ाल कर लाखों लोगों की जान ली है। शुरु शुरु में इन महामारियों के ईलाज के लिए का भी कोई टीका, दवाईयां, इंजेक्शन, जड़ी बूंटी  नहीं  होते है तथा मरीजों में इम्यूनिट...

कौरोना वायरस - लोकडाउन की आर्थिक कीमत | By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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भारत में जिस प्रकार कौरोना वायरस की रोकथाम के लिए चिकित्सीय व शासकीय उपाय अपनाये गये वहीं सम्पूर्ण नागरिकों की दैनिक व्यवस्था को भी लोकडाउन के हवाले कर दिया गया। 22 मार्च 2020 को जनता कफ्र्यू लगाया गया फिर 25 मार्च 2020 से इक्कीस दिन का लोकडाउन लगाया गया जिसको 3 मई 2020 तक बढ़ा दिया गया। कुछ राज्यों में लोकडाउन 3 मई 2020 से भी आगे लागू रहने की सम्भावना है। लोकडाउन के खुलने के बाद भी विभिन्न छूटें नागरिकों को नहीं मिलेंगी अपितू नागरिकों को विभिन्न प्रतिबन्धों में रहने के लिए विवश होना पड़ेगा। यदि शासन व प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रतिबंधों को नागरिकों ने उल्लंघन किया तो कौरोना वायरस का आक्रमण दुबारा होते देर नहीं लगेगी। यदि नागरिकों को भविष्य में मुसीबतें नहीं चाहिए तो उन्हें मजबूर होकर ही सही लोकडाउन के उपरान्त भी स्वंय को प्रतिबंधों में रहना पड़ेगा। लोकडाउन को भारत जैसा विकासशील देश अधिक समय तक बर्दास्त नहीं कर सकता। लोकडाउन का प्रत्येक दिन अपनी आर्थिक कीमत चुकाता है इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा पहले जान है तो जहान है पर जोर दिया गया और फिर जान के साथ जहान पर भी जोर दिया जाय...

कौरोना वायरस से लड़ने हेतू कट्टरपंथी नहीं अपितू असली पंथनिरपेक्षी बनने का समय - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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नवम्बर-दिस्म्बर 2019 से चीन से सम्पूर्ण विश्व में फैले नोवेल कौरोना वायरस-कोविद 19 की बिमारी ने अप्रैल-मई 2020 आते आते विश्व में महामारी का एक तुफान खड़ा कर दिया तथा विश्व में सभी समाज के लोगों की आकस्मिक मौत हो रही है। जिसका आंकड़ा लाखों में पंहुच गया है। सभी देशों को सामजिक, आर्थिक व राजनीतिक परेशानी उठानी पड़ रही है। विश्व में भुखमरी, बेरोजगारी, शारीरिक शक्तिहीनता, सहित अनेक तरह की दिक्कतों की ओर सम्पूर्ण समाज ही अग्रसर हो रहा है। विभिन्न पंथों के समुदायों के लोगों के आपसी भाईचारे में पलीता लगाया जा रहा है। मजहब विशेष के अनुयायी लोगों में कुछ अनपढ, जाहिल, आसामाजिक व कट्टरपंथी लोग अफवाह व गैर सामाजिक बातें फैलाते है जिससे समाज में विस्फोटक स्थिति बन जाती है। वे केवल स्वंय के मजहब को सर्वोत्तम समझ कर कोविद 19 की बिमारी का ईलाज न करवा कर मौत की गोद में जाने को तत्पर हो रहे है। यदि कोई व्यक्ति मौत के बाद प्राप्त होने वाली काल्पनिक सुविधाओं से आकर्षित होकर मौत को गले लगा रहा है तो यह उसका व्यक्तिगत मामला हो सकता है परन्तु मौत होते होते वह व्यक्ति बहुत से अन्य व्यक्तियों को मौत की सौगात क्यो...