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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत व चीन में आर्थिक प्रतिद्वन्दता - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि पड़ोसी कभी भी बदले नहीं जा सकते इसलिए उनसे भाईचारा बना कर रखना चाहिए तभी उन्होंने जब 26 मई 2014 को प्रथम बार प्रधानमंत्री के पद की शपथ ग्रहण ली तो उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारत के सभी पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंन्त्रित किया था तथा इसके पीछे उनकी मन्शा यही थी कि आओं हम सब मिल कर इस क्षेत्र में गरीबी, बिमारी, अशिक्षा व बेरोजगारी को दूर करें। परन्तु उनकी यह इच्छा कुछ पड़ोसियों की कट्टरवादिता, संकीर्ण विचारधारा तथा हठधर्मिता के कारण पूरी न हो सकी और वे पड़ोसी देश आतंकवाद व कट्ठमुल्लापन के पीछे ही भागते नजर आये। एक कहावत और भी है कि पड़ोसी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए इससे पड़ोसी से होड़ व प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। एक पड़ोसी दूसरे के जैसा बनने तथा आगे निकलने की होड़ में लगा रहता है यदि पड़ोसी ने कुछ हासिल किया तो दूसरा पड़ोसी भी येन - केन प्राकेण उसको हासिल करना चाहता है। यह प्रतिस्पर्धा अच्छी समझी जाती है तथा अधिकतर मामलों में इस प्रवृति से दोनों का कल्याण ही होता है तथा समृद्धि बढ़ती है। एशिया में भारत व चीन जो पड़ोसी देश है, में भी गत 5...

‘‘रामायण - Not Just Mythology" (मेरे विचार) | By Sonakshi Dhiman, Muzaffarnagar

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अपने मन की बात को पेन के माध्यम से पेपर पर उतारने का यह पहला प्रयास है। अगर आपको पसंद आये तो लाइक जरूर करें और कोई मिस्टेक हो तो कमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद 🙏 वैश्विक महामारी कोविड-19 ने आज समूचे विश्व में कोहराम मचाया हुआ है। हमारे देश में इसी महामारी के कारण 25 मार्च से ही लाॅकडाउन लगा हुआ है। यह कब तक रहेगा, इसके विषय में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लाॅकडाउन के शुरू होते ही, सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चला था कि वर्षों पहले दूरदर्शन पर प्रसारित हुए ‘‘रामायण’’ सीरियल का प्रसारण दोबारा किया जाये, जिसे सरकार ने गम्भीरता से लिया और रामायण सीरियल के पुनः प्रसारण का निर्णय लिया। मैं कक्षा आठ में थी, जब मैंने पहली बार दूरदर्शन पर रामायण देखी थी। तब रामायण एक एडवेंचर, मैजिकल और सिर्फ भगवान श्रीराम की कहानी लगती थी क्योंकि तब शायद मैं इतनी समझदार नहीं थी। लेकिन आज जब दोबारा रामायण पूरे ध्यान से और गम्भीरता से देखी तो कुछ नया अनुभव किया। रामायण सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं है। अगर आप इसे अपनी लाइफ से रिलेट करें तो रामाण हम सबके लिए शिक्षाप्रद है। रामायण के सभी कैरेक्टर हमें कुछ न कुछ सिखा र...

"कन्हैया" - By रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

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दही - माखन चुराकर कन्हैया बालपन में गोपियों से स्नेह पाया है 🙏 किशोर बन बाँसुरी की मधुर धुन बजाकर सबका दिल चुराया है... 🙏 सुना है यमुना किनारे गोपियो के संग रास रचाते थे तुम कान्हा...🙏 ज्ञानी उद्धव के अहंकार को प्रेम में डूबी गोपियो से तुड्वाया है...🙏  संहार किया अत्याचारी राक्षसॊ का खेल -खेल में तुमने मोहन🙏 कैसा अजब - गजब सा न्याय घनश्याम जमाने को दिखाया है🙏 बुराई का अंत बुरा ही होता है सीख दी सकल संसार को तुमने कृष्णा  🙏 कंश मामा जैसे पापी को मारकर दुनियां को पाप का अंत दिखाया है🙏 भरी सभा में हाथ बढाये जब निर्लज कौरवॊ ने  द्रोपदी के चीर हरण को🙏 बढाकर द्रोपदी का आंचल ऒ कान्हा तुमने अपना पौरुष निभाया है 🙏   शूरवीर अर्जुन के युद्ध में हाथ काँपे जब सामने अपनो को देखकर🙏 योगीराज तुमने देकर गीता का उपदेश डगमगाते अर्जुन को क्षत्रिय धर्म सिखाया है🙏 असंख्य लीला दिखाई है तुमने धरा पर जन्म लेकर मेरे मनमोहन 🙏 बाँसुरी बजाने वाले हाथो ने निरंकुश की सजा के लिये सुदर्शन चक्र भी उठाया है... 🙏 स्वरचित: रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

"मिट्टी से पहचान" - By रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

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अजीब लगा पढ़कर की ये क्या है "मिट्टी से पहचान"? हम क्या करेंगे या हम क्यों करें मिट्टी की पहचान?  अरे सुनिए तो सही कि मैं कौनसी मिट्टी की बात कर रही हूँ। जी हाँ मैं कोई चिकनी मिट्टी या रेतीली मिट्टी की बात नही कर रही हूँ ।  इन मिट्टी की अपनी विशेषता होती है । अपनी विशिष्ट भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं के माध्‍यम से विभिन्‍न प्रकार की फसलों को लाभ प्रदान करती है ।  अपितु मैं तो अपने देश की  मिट्टी  की बात कर रही हूँ । अपनी  मातृभूमि की बात कर रही हूँ, जिसकी महिमा के बारे में हमारे आराध्य श्री रामचंद्र जी ने भी कहा था '' जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'' ,  अर्थात् जननी (माता) और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी श्रेष्ठ एवं महान है। हमारे वेद पुराण तथा धर्मग्रंथ शुरू से ही इन दोनों का गुण गान करते आ रहे है, मगर आज हम कही इन दोनों को भूलते जा रहे है । इनकी छवि धूमिल होती जा रही है। इनकी साख आज हमारे व्यवहार और विचारो में कही कम होती जा रही है। आज हर किसी को बस विदेश जाना है वहीं रहना  है  क्यों ? क्योकि वहाँ तनख्वाह...

सैनिक और चिकित्सक - By नीमा शर्मा "हँसमुख" जी, नजीबाबाद

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सैनिक 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 अरे उस पार वालों से जरा जाकर के कह दो तो ।। ना बुझने दे इस पार के घर के चिरागों को। किसी की बुढ़ी माँ है किसी के बच्चे छोटे है॥ किसी की है जवां बीबी जो हुए बे सहारा है ॥ तिरंगे को कफ़न अपना  बनाकर वो तो लेटे है॥ बड़ी खुश है भारत माँ वो उसके बेटे है॥ 🌹🌹🌹 चिकित्सक 🌺🌺🌺🌺🌺 माँ भारती की सेवा में बन रक्षक रहे सदा तत्पर नमन् तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺 संकट छाया महामारी का कोरोना बना भक्षक बन बैठा काल तक्षक नमन्‌ तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺 अपने कर्म को माने पूजा सेवा भाव और न दूजा। रात दिन सेवा में तत्पर चले माँ भारती की सेवा मे पथ पर ॥ घर छोड़ा छोड़ा परिवार करे सद्भावना का व्यवहार ॥ नमन्‌ तुम्हे हे चिकित्सक .......🌺🌺🌺 खुद को कैद की कपड़ो की परतो मे तुम  योद्धा हो सही अर्थों में ॥ दिलाने आजादी महामारी से लड़नी है तुम्हे जंग अड़े खड़े हो माँ भारती के संग ॥ 🙏🙏🙏 नीमा शर्मा 'हंसमुख' जी नजीबाबाद (बिजनौर)

ईश्वर भक्ति भजन - By धर्मवीर राजपूत (दीप फोटो स्टूडियो)

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बुरे काम छोड़, रब से नाता जोड़, तुझे शांति मिलेगी सुबह शाम, बुरे काम छोड़ ..................................। कहता है बंदे तू नींद नहीं आती, आये भी कैसे दिल से ईष्र्या नहीं जाती, तूने दुखियों को सताया है तमाम, बुरे काम छोड़ ..................................। जायेगा प्राणी एक दिन जग से अकेला, तेरा ये तन है बंदे मिट्टी का ढेला, तेरी चमड़ी का कुछ नहीं दाम, बुरे काम छोड़ ..................................। कहते हैं ज्ञानी तुमसे अनुभव जग का, काम करो ऐसे जिससे भला होवे सबका, ‘‘धरम’’ रास्ता बताये है आसान, बुरे काम छोड़ ..................................। स्वरचित: धर्मवीर राजपूत दीप फोटो स्टूडियो, किरतपुर

लॉकडाउन 3.0 - By धर्मवीर राजपूत (दीप फोटो स्टूडियो)

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महामारी है ये कोरोना, ऐ इंसान सब अपने घर में रहो ना। जो डाॅक्टर, पुलिस तेरी करते हिफाजत, तुम शैतान बनके करो ना शरारत। बन के आये जो ये फरिश्ते, ऐ नादान तुम इन पे वार करो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। जो सरकार की बात तुमने ना मानी, फिर दिक्कत सभी को पड़ेगी उठानी। हम सबको है भारत बचाना, इसलिये आपस में तुम लड़ो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। जो कहते हैं मोदी, निश्चित जीत होगी, है विश्वास हमको, विजय टीम होगी। भागेगा ये इक दिन कोरोना, ऐ जवान तुम बिल्कुल भी डरो ना।। महामारी है ये कोरोना..................। स्वरचित: धर्मवीर राजपूत दीप फोटो स्टूडियो, किरतपुर

मजबूर मजदूर - By नीमा शर्मा 'हँसमुख' जी, नजीबाबाद

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कंधे पर बोझ लिए चलता रहा पथ पर। फैला चारों और सन्नाटा, मीलों का सफर। अनसुलझी गुत्थी सुलझाता चला जा रहा मैं पथ पर। महामारी का डर, फिर भी निडर। अपनों से मिलने की चाह चला हूँ मैं पथरीली राह। थके पाँव, लगे कई घाव। भूख है प्यास है, मंजिल की आस है। मैं पहुँचूँगा या नहीं, यही डर मन में लिए। आगे बढ़ता जा रहा हूँ मैं, चलता जा रहा हूँ मैं। अपने घर अपने गाँव, जहाँ मिलेगी अपनो की छाँव। मै मजदूर हूँ, मजबूर हूँ। झेल रहा महामारी का वार, चला हूँ अपनों का पाने प्यार। मै मजदूर हूँ, मजबूर हूँ। नीमा शर्मा 'हँसमुख' जी, नजीबाबाद (बिजनौर)

जिक्र है फ़िक्र है - By स्वo रामवीर सिंह राजपूत Rv Singh Rajput (10-04-2014)

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जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में। आग है कभी, कभी धुआं सा उठे, खलिश ये हवाओं की, सब कुछ कहे, उम्मीदों की बारिशें, भीग जाने की कोशिशें, ठंडक है फिज़ा की हर एक लहर में, जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में ।।1।। ख्वाब हैं बंधे बंधे, लब हैं सिले हुए, दिल बेचारा कब तक, सब कुछ सहे, लोक लाज की बंदिशें, बिखर जाने साजिशें, बेचैनी है धड़कन के हर ठहर में, जिक्र है फ़िक्र है, दिल के शहर में, हलचल सी है, हर एक पहर में ।।2।। स्वरचित: रामवीर सिंह राजपूत

महामारियों ने बदला है इतिहास | By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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वर्तमान में नवम्बर - दिसम्बर 2019 से चीन के वुहान शहर से शुरु हुई नोवेल कौरोना वायरस से उत्पन्न महामारी कोविद-19 ने सम्पूर्ण विश्व के 205 देशों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। कोविद-19 महामारी का अभी तक कोई ईलाज चिकित्सक वै ज्ञानिक  नहीं  खोज पाये है। बस मरीजों को तथा सामान्य जनता को यही बताया जा रहा है कि अपने शरीर में वायरसों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी पावर) को बढ़ायें और उसको ही बढ़ाने की कोशिशें हो रही है। इस महामारी में मरीज के फेफड़ों को वायरस के द्वारा जकड़ लिया जाता है तथा सांस अवरुद्ध होने से मरीज तड़फ तड़फ कर अपनी जान दे देता है। मरीज से वायरस का संक्रमरण दूसरे स्वस्थ्य लोगों को मरीज की सांस व सक्रंमित हाथों से लग जाता है जिससे वह भी 10-14 दिन में कोविद-19 का शिकार हो जाता है। इससे पूर्व भी विश्व में हैजा, पोलियों, प्लेग, कालरा, फ्लू, मलेरिया इत्यादि महामारियों ने मुनष्य के जीवन को खतरे में ड़ाल कर लाखों लोगों की जान ली है। शुरु शुरु में इन महामारियों के ईलाज के लिए का भी कोई टीका, दवाईयां, इंजेक्शन, जड़ी बूंटी  नहीं  होते है तथा मरीजों में इम्यूनिट...

कौरोना वायरस - लोकडाउन की आर्थिक कीमत | By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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भारत में जिस प्रकार कौरोना वायरस की रोकथाम के लिए चिकित्सीय व शासकीय उपाय अपनाये गये वहीं सम्पूर्ण नागरिकों की दैनिक व्यवस्था को भी लोकडाउन के हवाले कर दिया गया। 22 मार्च 2020 को जनता कफ्र्यू लगाया गया फिर 25 मार्च 2020 से इक्कीस दिन का लोकडाउन लगाया गया जिसको 3 मई 2020 तक बढ़ा दिया गया। कुछ राज्यों में लोकडाउन 3 मई 2020 से भी आगे लागू रहने की सम्भावना है। लोकडाउन के खुलने के बाद भी विभिन्न छूटें नागरिकों को नहीं मिलेंगी अपितू नागरिकों को विभिन्न प्रतिबन्धों में रहने के लिए विवश होना पड़ेगा। यदि शासन व प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रतिबंधों को नागरिकों ने उल्लंघन किया तो कौरोना वायरस का आक्रमण दुबारा होते देर नहीं लगेगी। यदि नागरिकों को भविष्य में मुसीबतें नहीं चाहिए तो उन्हें मजबूर होकर ही सही लोकडाउन के उपरान्त भी स्वंय को प्रतिबंधों में रहना पड़ेगा। लोकडाउन को भारत जैसा विकासशील देश अधिक समय तक बर्दास्त नहीं कर सकता। लोकडाउन का प्रत्येक दिन अपनी आर्थिक कीमत चुकाता है इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा पहले जान है तो जहान है पर जोर दिया गया और फिर जान के साथ जहान पर भी जोर दिया जाय...

कौरोना वायरस से लड़ने हेतू कट्टरपंथी नहीं अपितू असली पंथनिरपेक्षी बनने का समय - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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नवम्बर-दिस्म्बर 2019 से चीन से सम्पूर्ण विश्व में फैले नोवेल कौरोना वायरस-कोविद 19 की बिमारी ने अप्रैल-मई 2020 आते आते विश्व में महामारी का एक तुफान खड़ा कर दिया तथा विश्व में सभी समाज के लोगों की आकस्मिक मौत हो रही है। जिसका आंकड़ा लाखों में पंहुच गया है। सभी देशों को सामजिक, आर्थिक व राजनीतिक परेशानी उठानी पड़ रही है। विश्व में भुखमरी, बेरोजगारी, शारीरिक शक्तिहीनता, सहित अनेक तरह की दिक्कतों की ओर सम्पूर्ण समाज ही अग्रसर हो रहा है। विभिन्न पंथों के समुदायों के लोगों के आपसी भाईचारे में पलीता लगाया जा रहा है। मजहब विशेष के अनुयायी लोगों में कुछ अनपढ, जाहिल, आसामाजिक व कट्टरपंथी लोग अफवाह व गैर सामाजिक बातें फैलाते है जिससे समाज में विस्फोटक स्थिति बन जाती है। वे केवल स्वंय के मजहब को सर्वोत्तम समझ कर कोविद 19 की बिमारी का ईलाज न करवा कर मौत की गोद में जाने को तत्पर हो रहे है। यदि कोई व्यक्ति मौत के बाद प्राप्त होने वाली काल्पनिक सुविधाओं से आकर्षित होकर मौत को गले लगा रहा है तो यह उसका व्यक्तिगत मामला हो सकता है परन्तु मौत होते होते वह व्यक्ति बहुत से अन्य व्यक्तियों को मौत की सौगात क्यो...

कोरोना वायरस - लोकडाउन - अर्थव्यवस्था | By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 मार्च 2020 की सांय को घोषणा की कि भारत में कोरोना वायरस  से निपटने के हेतु देश भर में 21 दिन का लोकडाउन लागू होगा जो 24-25 मार्च 2020 की आधी रात से से 14 अप्रैल 2020 तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए व अनुरोध करते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि यदि कोरोना वायरस - लोकडाउन में लोग ढ़ंग से स्वंय नियन्त्रित होकर स्वंय को स्वंय के मकान में नहीं ठहरे रहे तो देश 21 वर्ष पीछे चला जायेगा। अभी तो मात्र 21 दिन ही कठिनाई सहन करनी पड़ेगी। इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 मार्च 2020 को घोषणा की थी कि 22 मार्च 2020 को जनता कफ्र्यू लागू होगा जिसमें सभी देशवासी अपने अपने घरों में रहें तथा किसी कार्य हेतू घर से बाहर न जायें तथा सांय 5 बजे अपने घर की बालकनी में आकर घंटे, शंख, ताली, थाली इत्यादि बजा कर उन सेवकों को शुक्रिया अदा करेंगे जो इस भंयकर परिस्थिति में भी लोगों की किसी न किसी प्रकार से सेवा कर रहे है जिनमें चिकित्सक, नर्स, चिकित्सीय कर्मचारी, सुरक्षा में लगे सिपाही, सफाई में लगे कर्मचारी तथा अन्य सभी सेवा में लगे लोग ...