सुस्ती से निकलती अर्थव्यवस्था - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के विपक्षी दल तथा उनके तथाकथित अर्थशास्त्री अर्थव्यवस्था में मंदी व सुस्ती की स्थिति देख रहे थे, परन्तु एक फरवरी 2020 को वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस प्रकार से बजट पेश किया उससे लगने लगा है कि अर्थव्यवस्था अब कुछ ही समय में तथाकथित सुस्ती के शिकंजे को तोड़कर गतिमान स्थिति में पहुंच जायेगी तथा मंदी की स्थिति तो पहले से ही नहीं थी और अब अर्थव्यवस्था ज्यादा सुधर जायेगी। 

बजट 2020-21 में कई दूरदर्शी प्रस्ताव है जिससे देश की बुनियाद को मजबूत रखने के लिए मदद मिलेगी। इन बुनियादी कदमों को लागू करने में सरकार को अच्छी खासी मशक्कत तो करनी ही पड़ेगी परन्तु इतना जरुर है कि देश की अर्थव्यवस्था अब विकास की रफ्तार और तेज गति पकड़ सकेगी। 

वर्ष 2020-21 के बजट में 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रख गया है जबकि वर्ष 2019-20 में जीड़ीपी 3.8 प्रतिशत रहा था जबकि इसका अनुमान 3.3 प्रतिशत लगाया गया था। सरकार अपने विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए संकल्पित है यदि यह लक्ष्य प्राप्त होता है तो यह ऐतिहासिक ही होगा। वर्ष 2019-20 के विनिवेश का लक्ष्य 1.05 लाख करोड़ रुपये रखा गया था जोकि प्राप्त नहीं हो सका था। इसी प्रकार लघु बचतों से वर्ष 2020-21 में 2.4 लाख करोड़ रुपये जुटाये जाने का लक्ष्य है जबकि वर्ष 2019-20 में शुरुआती अनुमान 1.3 लाख करोड़ रुपये था। वित्तीय घाटे का 30 प्रतिशत भाग इससे पूरा नहीं होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। सरकार के सामने रोजगार सृर्जन, वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना तथा वर्ष 2024 तक अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ डॉलर तक ले जाने का महारथी लक्ष्य है जिनको प्राप्त करने के लिए सरकार को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

वर्ष 2020-21 के लिए सकल कर राजस्व में 12 प्रतिशत की बृद्धि का लक्ष्य है जबकि बजट में सामान्य  जीड़ीपी बृद्धि दर का लक्ष्य 10 प्रतिशत रखा गया है। जीएसटी में 12.76 प्रतिशत की बृद्धि का लक्ष्य अर्थात 6.90 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रति माह के औसत संग्रहण में 15 प्रतिशत की बृद्धि की जरुरत होगी। आयकर संग्रह में जीड़ीपी के 2.8 प्रतिशत से बृद्धि का अनुमान है। सामान्य जीड़ीपी में 10 प्रतिशत की बृद्धि व कर राजस्व में 12 प्रतिशत की बृद्धि होती है तो टैक्स बायोंसी 1.2 प्राप्त करना बहुत कठिन कार्य है। यह वर्ष 2019-20 में 0.5 रहा था। 

वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 11 फरवरी 2020 को अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरो में प्रमुख सात सुधार संकेत (ग्रीन शूट्स) बताये थे। उन्होनें स्पष्ट कहा कि यूपीए सरकार की तुलना में इस सरकार में अर्थव्यवस्था में बेहतर कार्य हुआ है। उनके बताये सात सुधार के संकेत है- विश्व में भारत के प्रति सकारात्म्क महौल बना है। वित वर्ष के पहले आठ महिनों में विदेशी निवेश 21.4 अरब डॉलर की तुलना में 24.4 अरब डॉलर हो गया है। 2- अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 106 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढ़ांचे को निर्माण करने की परियोजनाऐं पाइप लाइन में है। 3- गत कई महिनों से औद्योगिक उत्पादन में चल रही गिरावट रुकी है। नवम्बर 2019 में औद्योगिक उत्पादन की दर 1.8 प्रतिशत रही है। 4- मैन्यूफैक्चरिंग का पीएमआई इंडे़क्स भी सकरात्मक है। 5- इस समय विदेशी मुद्रा भंडार 466.69 अरब डॉलर का हो चुका है। 6- जीएसटी गत कुछ महीनों से 1 लाख करोड़ रुपये प्रति मास संग्रहित हो रहा है। 7- आंकड़ों से यह साबित हो रहा है कि प्राइमरी व सैकंड़री मार्केट में भी तेजी आने लगी है।

वित मंत्री का यह भी कहना था कि आम बजट में उठाये गए 13 विभिन्न कदमों से अर्थव्यवस्था में आयी चुनौतियों का समाधान होने लगा है। क्रेड़िट गांरटी ट्रस्ट की स्थापना, टर्न ओवर सीमा में बृद्धि, कई वस्तुओं के आयात पर अंकुश के लिए सीमा शुल्क में बढ़ोत्तरी तथा नेशनल लोजिस्टिक पॉलिसी इत्यादि कदम शामिल है। वित मंत्री ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया कि सरकार आयकर अधिनियम का उपयोग उद्योगपतियों के उत्पीड़न के लिए कर रही है। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति संतोषजनक है। देश की अर्थव्यवस्था की अच्छी स्थिति है तथा विशेष कर वृहत अर्थव्यवस्था के संकेतक अच्छी स्थिति में है। सरकार अर्थव्यवस्था को गतिमान करने के लिए प्रत्येक संभव प्रयास कर रही है। उनका एक मात्र लक्ष्य अर्थव्यवस्था को 8 प्रतिशत की दर पर पंहुचाना है।

बजट में प्रमुख विशेषता में आयकर ढ़ांचे का सरलीकरण शामिल है। सरलीकरण के प्रति संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है। करदाताओं के मन में यह भ्रम पैदा हो सकता है कि वे आयकर भुगतान के लिए वैकल्पिक प्रणाली का चयन करें अथवा पुराने आयकर प्रणाली को ही स्वीकार करें। वित मंत्री के अनुसार आयकर के दो प्रणालियां होने से करदाताओं को पहली बार विकल्प चुनने की सुविधा मिलने वाली है। इसमें कोई जटिलता वाली बात नहीं है। क्योंकि दोनों ही प्रणाली में करदाताओं के लिए पांच लाख रुपये तक की आय कर मुक्त होगी। सरकार ने अब तक चल रही 100 से ज्यादा तरह की छूटों में से 70 तरह की छूट समाप्त कर दी हैं, शेष बची छूटों को आगे आने वाले समय में समाप्त करने का सरकार का मंतव्य है। आयकर की नई दरों से सरकार को 40 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा परन्तु इस घोषणा से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी। सरकार ने गत वर्ष कॉर्पोरेट टैक्स के ढ़ांचे में बदलाव कर उसे सरल किया था। सरकार उसी तर्ज पर आयकर के ढ़ांचे का भी सरलीकरण कर रही है। अब देखना यह है कि देश के अधिकतर लोग दोनों प्रणालियों में से कौन सी प्रणाली अधिक पंसद करते है। लोग चाहें तो छूट का लाभ लिए बिना कम आयकर दे सकेंगे अथवा छूट का फायदा उठा कर आयकर देना चाहते है। आयकरदाता को जब आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं में जब बहुत सारी छूटें उपलब्ध होती है तो उनसे आयकरदाता एक जटिलता में फंस जाता है और उसे सीए या वकील की जरुरत महसूस होती है। सरकार ने आयकर के सुधार की जिस दिशा में कदम उठाया है, उसकी उपयोगिता धीरे धीरे सामने आयेगी और फिर भ्रम जैसी कोई बात सामने नहीं होगी। इस ढांचे से युवा करदाताओं को लाभ होगा जो अधिक बचत नहीं कर पाते है। बचत की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। आयकरदाता बिना छूट के भी आयकर चुकाने से उन्हें कोई हाानि नहीं होगी। नयी प्रणाली चुन कर भी उन्हें उतना ही आयकर चुकाना होगा जितना कि वे पहले चुकाते थे। छूटों का लाभ लेने के लिए प्रामाण पत्र की आवश्यकता होती थी। अब बस नई प्रणाली में आयकरदाता तभी आ सकेंगे जब वे किसी छूट का लाभ नहीं लेंगे। जब लोगों के पास अधिक पूंजी होगी तो वे स्वंय तय कर सकेंगे कि वे निवेश कहां करें? आयकर में सरलीकरण से देश के मध्यम वर्ग के हाथ में अब रुपया ठहर सकेगा जिससे अर्थव्यवस्था की सुस्ती समाप्त हो सकेगी।  
    
बजट में सरकार के द्वारा उठाये गये कदमों से देश में अर्थव्यस्था में सुस्ती दूर हो सकेगी ऐसी आशा की जानी चहिए।


डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल
44 आदर्श काॅलोनी
मुजफ्फरनगर 251001 (उoप्रo)


डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल सनातन धर्म महाविद्यालय, मुजफ्फरनगर (उoप्रo), के वाणिज्य संकाय के संकायाध्यक्ष व ऐसोसियेट प्रोफेसर के पद से व महाविद्यालय के प्राचार्य पद से अवकाश प्राप्त हैं तथा स्वतंत्र लेखक व टिप्पणीकार हैं।


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