सैनिक और चिकित्सक - By नीमा शर्मा "हँसमुख" जी, नजीबाबाद
सैनिक
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अरे उस पार वालों से
जरा जाकर के कह दो तो ।।
ना बुझने दे इस पार के
घर के चिरागों को।
किसी की बुढ़ी माँ है
किसी के बच्चे छोटे है॥
किसी की है जवां बीबी
जो हुए बे सहारा है ॥
तिरंगे को कफ़न अपना
बनाकर वो तो लेटे है॥
बड़ी खुश है भारत माँ
वो उसके बेटे है॥
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चिकित्सक
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माँ भारती की सेवा में बन रक्षक
रहे सदा तत्पर
नमन् तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺
संकट छाया महामारी का
कोरोना बना भक्षक
बन बैठा काल तक्षक
नमन् तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺
अपने कर्म को माने पूजा
सेवा भाव और न दूजा।
रात दिन सेवा में तत्पर
चले माँ भारती की सेवा मे पथ पर ॥
घर छोड़ा छोड़ा परिवार
करे सद्भावना का व्यवहार ॥
नमन् तुम्हे हे चिकित्सक .......🌺🌺🌺
खुद को कैद की कपड़ो की परतो मे
तुम योद्धा हो सही अर्थों में ॥
दिलाने आजादी महामारी से
लड़नी है तुम्हे जंग
अड़े खड़े हो माँ भारती के संग ॥
🙏🙏🙏
नीमा शर्मा 'हंसमुख' जी
नजीबाबाद (बिजनौर)

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