‘‘रामायण - Not Just Mythology" (मेरे विचार) | By Sonakshi Dhiman, Muzaffarnagar
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वैश्विक महामारी कोविड-19 ने आज समूचे विश्व में कोहराम मचाया हुआ है। हमारे देश में इसी महामारी के कारण 25 मार्च से ही लाॅकडाउन लगा हुआ है। यह कब तक रहेगा, इसके विषय में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
लाॅकडाउन के शुरू होते ही, सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चला था कि वर्षों पहले दूरदर्शन पर प्रसारित हुए ‘‘रामायण’’ सीरियल का प्रसारण दोबारा किया जाये, जिसे सरकार ने गम्भीरता से लिया और रामायण सीरियल के पुनः प्रसारण का निर्णय लिया।
मैं कक्षा आठ में थी, जब मैंने पहली बार दूरदर्शन पर रामायण देखी थी। तब रामायण एक एडवेंचर, मैजिकल और सिर्फ भगवान श्रीराम की कहानी लगती थी क्योंकि तब शायद मैं इतनी समझदार नहीं थी। लेकिन आज जब दोबारा रामायण पूरे ध्यान से और गम्भीरता से देखी तो कुछ नया अनुभव किया।
रामायण सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं है। अगर आप इसे अपनी लाइफ से रिलेट करें तो रामाण हम सबके लिए शिक्षाप्रद है। रामायण के सभी कैरेक्टर हमें कुछ न कुछ सिखा रहे हैं, जैसे पिता के लिये पुत्र का कर्तव्य, भाई का भाई के लिये प्रेम, त्याग और सबसे इम्पोर्टेन्ट ‘‘मर्यादा’’, जो श्रीराम के साथ-साथ माता सीता के कैरेक्टर में भी देखने को मिलती है।
रामायण में मैंने जो कैरेक्टर सबसे ज्यादा अब्ज़र्व किया, वो है माता सीता का कैरेक्टर। रामायण में माता सीता का व्यक्तित्व आज नारी समाज के लिये ऐसी सीख है, जिससे आत्मविश्वास, चरित्र, त्याग और मर्यादा के सही मायने पता चलते हैं। अगर आज हर नारी माता सीता और हर पुरूष श्रीराम के व्यक्तित्व को अपने जीवन में उतार ले तो हर घर मन्दिर और पूरा समाज स्वर्ग का रूप ले लेगा।
मेरे विचार में रामायण केवल श्रीराम की बायोग्राफी या माइथोलाॅजी इपिक ही नहीं, बल्कि यह आज की उस जेनेरेशन के लिये एक मोटिवेशन है, पथ-प्रदर्शक है, जिसके लिये मर्यादा, धर्म, संस्कार और चरित्र के अर्थ ही बदल गये हैं।

बढ़िया
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