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मंड़ल व कमंड़ल में राजनीति व राष्ट्रनीति का अंतर निहीत है - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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वर्ष 1990 में मंड़ल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों को 27 प्रतिशत का आरक्षण देने के लिए एक राजनीतिक कदम उठाया क्योंकि तभी भाजपा के प्रमुख राजनेता लाल कृष्ण आड़वाणी ने आयोध्या में रामजन्म भूमि मंदिर के निर्माण के लिए गत कई दशकों से एक बहुत सोची समझी गई राष्ट्रनीति के तहत सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा का एक संकल्प लिया था। आड़वाणी की रथ यात्रा देश में राष्ट्र भावना को जागृत करते हुए सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सुत्र में पिरोने के लिए उठाया गया कदम था तथा यह एक राष्ट्रीय कार्य था क्योंकि यह महसूस किया जा रहा था कि जनमानस बाबरी ढ़ांचे को लेकर एक प्रकार की गुलाम व हीन भावना से गृस्त है। उसका तत्कालीन राजनीतिक महत्व नहीं था, न ही उससे भाजपा को रामजन्म भूमि मंदिर मन जाने से कोई राजनीतिक लाभ होता परन्तु भाजपा के इस अभियान को जिस प्रकार विपक्ष ने मुद्दा बनाया जिससे उनकी राजनीतिक कुर्सी हिलती सी लगी तो उन्होंने कुर्सी बचाने व अपने अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए केन्द्र सरकार के संकेत पर 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में...

नारी - By नीमा शर्मा ‘हँसमुख’ Neema Sharma 'Hansmukh', Najibabad

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  वो चिता सी जली रात भर रात भर वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक। जिम्मेदारी की लकड़ी  लगाये हुए कांधे पर बोझ सबका उठाये हुए अपनी आशाओं का  घृत चढ़ाए हुए वो तो जलती रही रात भर रात भर। संस्कारो की चादर को ओढ़े हुए पुष्प की भांति वो मुस्कुरती रही शाम ढलते ही वो मुरझाती रही वो चिता सी जली रात भर रात भर वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक। कुंभ आँखो का मेरी छलकने लगा पीड़ा के छिद्र से वो छलकने लगा वो छलकती रही रात भर रात भर वो चिता सी जली................। उसका तन मन समर्पित समाहित हुआ परिवार को मेरे परिवार को  कल्पनाओं के कुंड में प्रवाहित हुआ वो तो बहती रही राख राख बन वो सुलगती रही प्रातः तक प्रातः तक वो चिता सी जली रात भर रात भर।। नीमा शर्मा 'हँसमुख' नजीबाबाद,  बिजनौर (उ०प्र०)  

एक विचारणीय प्रश्न By नीरज राजपूत

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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। एक प्रश्न के लिए मेरा विचार बहुत दिनों से मेरे मन में आ रहा था, परंतु समय के अभाव के चलते संभव नहीं हो पाया। आजकल शादी-ब्याह का सीजन भी शुरू हो चुका है और नए रिश्ते, सगाई अभी खूब हो रही हैं। मेरा प्रश्न लड़की वालों से यह है कि लड़के वालों द्वारा किसी वस्तु विशेष की मांग रखना जिस प्रकार से गलत है तो अपनी लड़की के लिए बहुत ज्यादा सैलरी वाले या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का देखना कहां तक सही है? आज के दौर में जमीन परिवारों में बंटवारे होने की वजह से लगातार कम हो रही तो किसके पास अधिक जमीन मिलेगी? कुछ मध्यमवर्गीय परिवारों में अच्छे सुंदर, सुशील और प्राइवेट जॉब करने वाले लड़के सिर्फ इसलिए ही अरेंज मैरिज नहीं कर पा रहे हैं कि जमीन बहुत कम है, रिश्ता कहां से आएगा? आधुनिक दौर में लड़कियां भी आजकल लव मैरिज को ही ज्यादा पसंद कर रही हैं तो हम किस मुंह से अपनी संस्कृति व को सभ्यता बचाने की बात कर रहे हैं? लड़के वाला दहेज मांगे तो गलत और लड़की वाला सरकारी नौकरी या बहुत ज्यादा जमीन जायदाद वाला लड़का ढूंढे तो सही? यह कैसी दोहरी मानसिकता हो गई है हम लोगों की? और रही बा...

ग़ज़ल : "बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है" - डॉ0 अशोक "गुलशन"

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बाढ़ में सब बह गया है और सबकुछ ठीक है, अब न कोई आसरा है और सबकुछ ठीक है। हो गयीं बर्बाद फसलें पेड़ गायब हो गये, द्वार पर पानी भरा है और सबकुछ ठीक है। गाँव आने पर जो दिखता था मुझे हँसते हुये, आदमी वह  खो गया है और सबकुछ ठीक है। खाट  पर  बिस्तर  नहीं है और टूटी खाट है, आठ-दस घर ही गिरा है और सबकुछ ठीक है। मुँह घुमाकर बात मुझसे कर रहे सब लोग हैं, सूर्य पश्चिम से उगा है और सबकुछ ठीक है। काम पर निरहू गये हैं छः महीने बाद फ़िर, बाँझ को बच्चा हुआ है और सबकुछ ठीक है। गाय की  पूँजी  रही  जो  वो  दवाई ले गयी, रह गया बछड़ा बचा है और सबकुछ ठीक है। पेट की ख़ातिर चलो परदेश को 'गुलशन' चलें, बस यही इक रास्ता है और सबकुछ ठीक है।  डॉ0 अशोक "गुलशन " उत्तरी क़ानूनगोपुरा, बहराइच (उ0प्र0), पिन-271801

भगत सिंह - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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  खेतों में वो गोली बोना सिखा गया  पहन बसंती चोला मान हमारा बढ़ा गया  हिल गई बर्तानिया हुकुमत की चूंरें  मच गया हड़कम्प ब्रिटेन में पूरे  वो माँ का लाल तो आजादी का दीवाना था  बाकी सारा जग उसके लिए बेगाना था  थी दुल्हन आजा़दी उसकी, जीवन उसी पर वारा था  दुर्गा भाभी का वो देवर सबकी आखों का तारा था  संसद में बम फेंककर बहरों को आवाज़ सुना गया  चूहों जैसे दिल वाले अंग्रेजों को वो हिला गया  झूल गया फ़ाँसी पर फंदा अपना चूमकर  वो मतवाला जीना हमको सिखा गया झूमकर ।   मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)

धूप हो या छाँव हमें निरन्तर चलना होगा - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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धूप हो या छाँव हमें निरन्तर चलना होगा।    भीड़ हो या गाँव आगे सदा निकलना होगा॥  मिलेंगे कई साँचे तुम्हें तोड़ सभी साँचों को।  एक नया साँचा तुम्हें स्वयं गढ़ना होगा॥  राहें हो चाहे कितनी पथरीली हर मुश्किल से लड़ना होगा।    आए आँधी या तूफ़ा हो हमको कभी न डिगा पाएगा॥  बढ़ते हुए क़दमों के साथ हाथ सभी का थामना होगा।  गिर गयें हैं जो लड़खड़ाकर उन्हें उठाकर चलना होगा॥  ज़िन्दगी कोई ख़्वाब नहीं जंग है पथरीली राहों से।  मंज़िल भी आसान नहीं ताज भरा है काँटों से॥  मशाल गर बदलाव की थाम सको तो चलो।  चीर कर अंधेरों को रोशनी ला सको तो चलो॥ मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)

चेहरे की मुसकान बन जाए पहचान - By Dr. Anil Sharma 'Anil', Dhampur, Bijnor (U.P.)

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    चेहरे की मुसकान, बन जाए पहचान हंसते हंसाते आप, जब खिल खिलाएंगे। हॅंसी एक रामबाण, औषधि का करें काम देख लो प्रयोग कर, कष्ट कट जाएंगे।। शारीरिक मानसिक, कैसी भी हो परेशानी, दूर होगी झटपट, आप सुख पाएंगे। झूम झूम उठे तन, मन भी होगा प्रसन्न,  जोर का ठहाका मित्र, संग में लगाएंगे।। अपनाओ हास्य योग, दूर होंगे सब रोग, होंगे सब ही निरोग, हंसेंगे हंसाएंगे। लाफिंग थेरेपी अब, हो रही है लोकप्रिय देश और विदेश में, लोग अपनाएंगे।। मिट जाते कई शूल, हंसने हंसाने से तो हंसोंगे अगर मित्र, रोग न सताएंगे। हॅंसी एक रामबाण, औषधि का करें काम देख लो प्रयोग कर, कष्ट कट जाएंगे।। डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल' धामपुर, उत्तर प्रदेश

वही ठीक लगे घड़ी, जो व्यतीत हो गई - By Dr. Anil Sharma 'Anil', Dhampur, Bijnor (U.P.)

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 पुरातन काल वाली, शिक्षाएं और संस्कृति, संस्कारों सहित अब, रोजगार हो गई।  शिक्षा की दुकानें सजी, शोरूम संस्कारों वाले संस्कृति भी आजकल, तो व्यापार हो गई । योग से निरोग वाले, पैकेज है बिक रहे  सेवा त्याग भावनाएं, आधार ही खो गई । कैसा भी करिए काम, पूरा लीजिएगा दाम  आजकल नीति यही, तो संस्कार हो गई। जीविका कमाने हित, काम सभी जन करें गुरुकुल वाली प्रथा, कालातीत हो गई । अब सब व्यवसाय, संस्कृति संस्कार शिक्षा  सेवा भावना की बात, तो अतीत हो गई । धर्म-कर्म व्यवसाय, कलाएं सभी व्यापार  धन संग गाए जाने, वाले गीत हो गई । अभी बदला समय, और भी यह बदलेगा  वही ठीक लगे घड़ी, जो व्यतीत हो गई। डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल' धामपुर, उत्तर प्रदेश

आलस किया, सफलता गयी - By Dr. Anil Sharma 'Anil', Dhampur, Bijnor (U.P.)

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 विधा - छंद शीर्षक - आलस किया, सफलता गयी आलस को ज्ञानी जन, कहते रहे है शत्रु, इससे किसी का कभी, कोई न हुआ भला। काम टलते ही रहे, हाथ मलते ही रहे, वक्त बीत गया जब, जोर न कोई  चला। आलसी प्रवृत्ति वाले, हर एक काम टाले, समय प्रबंधन की, जानते नहीं कला। इसीलिए पछताते, सफलता नहीं पाते, इन्होंने तो हर बार, बस हाथों को मला।। जब भी आलस किया, सफलता गयी दूर, आलस,सफलता की,शत्रुता पुरानी है। सफलता चाहे श्रम, इसमें न पालें भ्रम, आलस को छोड़ यदि, सफलता पानी है। कर्म के बिना न कभी, मिलता किसी को कुछ सतत कर्म ही बस, जीवन निशानी है। आलस है मौत सम, इससे बचेंगे हम, पग पग हो सफल, मन में ये ठानी है।। डॉ. अनिल शर्मा 'अनिल' धामपुर, उत्तर प्रदेश

यारों छोडो स्मोकिंग सभी - By रामवीर सिंह राजपूत

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यारों छोडो स्मोकिंग सभी, जी लो जी भरके ये जिंदगी । ये बीडी सिगरेट, गुटखा तम्बाखू , बेकार की चीजें हैं, इनके बिना ही जीवन में, जीने की असली मोजें हैं, इनको छोड़कर पालो ख़ुशी, जीलो जी भरके ये जिंदगी ।। १ ।। यारों की टोली में, कभी तन्हायी में, मुझको मिली ये लत बुरी, बेपरवाह मन से, मेहनत के धन से, सीने में घोंपी अपने छुरी, बीमारी की दलदल में लाइफ ये फंसी, जीना न सका जी भर के जिंदगी ।। 2।। जब था मैं इनमें जकड़ा, साँसों की बीमारी थी, कभी मुह में छाले थे, दांतों में बीमारी थी, अब सुलझा तो होंठों पे हंसी, जीता हूँ जी भरके ये जिंदगी ।। 3 ।। सांसें भी होंगी ताज़ी तुम्हारी, दूषित न होगा रक्त भी, फिट रहोगे, पैसे बचेंगे, कीमती बचेगा वक्त भी, संभलो बनाओ अच्छी छवि, जीलो जी भरके ये जिंदगी ।। 4 ।। - स्व० रामवीर सिंह राजपूत

जब हाथों से लम्हा फिसल जाता है - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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जब हाथों से लम्हा फिसल जाता है  जब आँखो में समंदर थम जाता है जब पैरों के नीचे से खींच ले कोई ज़मी  जब न रहे सर पे आसमा की चादर तनी  तब यह पथरीली राहें साथ चलती है हमारे  देती हैं हौसला चलते जाने का  काँटों में फूलों में नदिया की बहती धारों में  क़दमबढ़ाते जाना है पत्थर में फूल खिलाना है  जीवन हर पल गीत है संघर्षो का  हमारे कष्टों के नये अवतरणो का  आशा और निराशा के झूले में - हिचकोले लेते सम्बन्धों का  मंज़िल की तरफ़ बढ़ते क़दमों को  पीछे खींचती जकड़ी ज़ंजीरो का  खड़ी हैं यही राहें रास्ता रोके हर मुश्किल का । मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)

हिन्दी की व्यथा - By दीप्ति मिश्रा, उझानी, बदायूं

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हिन्दी बोली उर्दू से  न तेरी खता न मेरी ख़ता  मिली हमें फ़िर किस बात की सजा  हम दोनो कभी लड़ी नहीं  शिकायत कभी की नहीं  फ़िर यह कैसा अलगाव है  दोनो पक्षों में कैसा टकराव है  एक दीर्घ मौन के बाद  बोली उर्दू निराशा से  कुछ नहीं  यह षड्यन्त्र है हमारे शत्रु का  एक प्रयास है आंग्ल चमचो का  हम दोनों को आपस में लड़ा दिया  और अंग्रेजी को सम्राट बना दिया  हम दोनो भोली कन्याएँ भारत की  नहीं समझ सकी कूटनीति अंग्रेजी की  सहसा हिन्दी बोली दीर्घ श्वास छोड़कर  हाँ किसी ने कहा तो ठीक ही है  बिल्लियों की लड़ाई में फ़ायदा उठाता बन्दर ही तो है  लेकिन अब हम मूर्खता नहीं करेंगे आपस में हम अब नहीं लड़ेंगे  हर षड्यन्त्र अंग्रेजी का हाँ विफल करेंगे । मौलिक रचना: दीप्ति मिश्रा उझानी,  बदायूं  (उत्तर प्रदेश)

यूँ किसी को ना बातें बनाया करो - By नीमा शर्मा ‘हँसमुख’ Neema Sharma 'Hansmukh', Najibabad

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यूँ किसी पर कीचड़ न उछाला करो, यूँ किसी को ना बातें बनाया करो। पाक दामन तुम्हारा ना बच पायेगा, यूँ किसी पर न तोहमत लगाया करो।। अपने रिश्तों को यूँ तुम संभाला करो, नाज़ुक हैं, इनको निभाया करो। ग़र लगी ठेस तो टूट जायेंगे ये, प्रेम की डोर से इनको बाँधा करो।। प्रीत की बगिया दिल में लगाया करो, पुष्प चुन-चुन के काँटे हटाया करो। रिश्तों का हार तुम गूँथो तो सही, रिश्ते चुन-चुन के उसमें पिरोया करो।। नफरतों की आँधी ना चलाया करो, ना अपनों पर अँगुली उठाया करो। दर्द होगा उसी में जो कट जायेगी, बेवजह ना किसी को रूलाया करो।। यूँ किसी पर कीचड़ न उछाला करो, यूँ किसी को ना बातें बनाया करो।। नीमा शर्मा 'हँसमुख' नजीबाबाद,  बिजनौर (उ०प्र०)  

ग़ज़ल - ए दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर | By Dr. Manju Jauhari 'Madhur'

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ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। ये काफिले तो जिंदगी में होंगे हर घड़ी, तू फिर से मुझे भूल न जाने की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। यादों के उजाले हैं वो यादों की बारातें, संग बैठ मेरे सपने सजाने की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। रिसते हुए जख्मों पे मेरे ना लगा मरहम छाले पड़े जो तेरे हैं तू उनकी बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। ये सच है साथ खाईं थी बचपन मैं रोटियाँ हाथों से माँ के खाए निवालों की बात कर ऐ दोस्त मेरे दिल से ना जाने की बात कर रुठा हुआ है दिल तू मनाने की बात कर। रचनाकार: डॉ० मंजु जौहरी 'मधुर' 8851760946

सच्ची पूर्व दिशा और 21 जून का महत्व - BY हेमन्त कुमार

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उत्तर भारत में जिस तरफ हम उँगली करके कहते हैं कि यह पूर्व है वह वास्तविक पूर्व दिशा नहीं होती। दरअसल पूर्व दिशा ज्ञात करने के लिए हम उगते हुए सूरज को मानक मानते हैं। परंतु उत्तर भारत में सूरज पूर्व दिशा से दक्षिण की ओर हट कर उगता है। अब प्रश्न उठता है कि सच्ची पूर्व दिशा का कैसे पता चले। इसके लिए 21 जून का इंतजार करना पड़ता है और जाना पड़ता है कर्क रेखा पर। कर्क रेखा उत्तर भारत के सबसे नजदीक का वह बिंदुपथ है जहाँ 21 जून को सूर्य की किरणें धरती पर एकदम लंबवत पड़ती हैं। इस दिन कर्क रेखा पर सूर्य ठीक पूर्व में उगता है और ठीक पश्चिम में अस्त हो जाता है।  उज्जैन नगर कर्क रेखा पर ही बसा है और इसी वजह से प्राचीन भारत की खगोलीय गणनाओं का अनुसंधान स्थल रहा। महान भारतीय खगोलविद आर्यभट्ट ने उज्जैन में 21 जून के तत्सम्मत दिन पृथिवी के व्यास की गणना की थी। यह कैसे पता चला कि कर्क रेखा पर 21 जून को सूर्य की किरणें सीधी/लंबवत पड़ती हैं? यह ज्ञात हुआ गहरे कुँए से। कुआँ कितना ही गहरा क्यों न हो  कर्क रेखा पर बने कुँए में 21 जून की दोपहर को तली तक धूप पहुँच जाती है वह भी पूरी तली में। पूरी तली में ...

भारत व चीन में आर्थिक प्रतिद्वन्दता - By डाॅo सूर्य प्रकाश अग्रवाल (Dr. S.P. Agarwal)

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि पड़ोसी कभी भी बदले नहीं जा सकते इसलिए उनसे भाईचारा बना कर रखना चाहिए तभी उन्होंने जब 26 मई 2014 को प्रथम बार प्रधानमंत्री के पद की शपथ ग्रहण ली तो उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में भारत के सभी पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंन्त्रित किया था तथा इसके पीछे उनकी मन्शा यही थी कि आओं हम सब मिल कर इस क्षेत्र में गरीबी, बिमारी, अशिक्षा व बेरोजगारी को दूर करें। परन्तु उनकी यह इच्छा कुछ पड़ोसियों की कट्टरवादिता, संकीर्ण विचारधारा तथा हठधर्मिता के कारण पूरी न हो सकी और वे पड़ोसी देश आतंकवाद व कट्ठमुल्लापन के पीछे ही भागते नजर आये। एक कहावत और भी है कि पड़ोसी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए इससे पड़ोसी से होड़ व प्रतिस्पर्धा बनी रहती है। एक पड़ोसी दूसरे के जैसा बनने तथा आगे निकलने की होड़ में लगा रहता है यदि पड़ोसी ने कुछ हासिल किया तो दूसरा पड़ोसी भी येन - केन प्राकेण उसको हासिल करना चाहता है। यह प्रतिस्पर्धा अच्छी समझी जाती है तथा अधिकतर मामलों में इस प्रवृति से दोनों का कल्याण ही होता है तथा समृद्धि बढ़ती है। एशिया में भारत व चीन जो पड़ोसी देश है, में भी गत 5...

‘‘रामायण - Not Just Mythology" (मेरे विचार) | By Sonakshi Dhiman, Muzaffarnagar

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अपने मन की बात को पेन के माध्यम से पेपर पर उतारने का यह पहला प्रयास है। अगर आपको पसंद आये तो लाइक जरूर करें और कोई मिस्टेक हो तो कमेंट करके जरूर बताएं। धन्यवाद 🙏 वैश्विक महामारी कोविड-19 ने आज समूचे विश्व में कोहराम मचाया हुआ है। हमारे देश में इसी महामारी के कारण 25 मार्च से ही लाॅकडाउन लगा हुआ है। यह कब तक रहेगा, इसके विषय में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लाॅकडाउन के शुरू होते ही, सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चला था कि वर्षों पहले दूरदर्शन पर प्रसारित हुए ‘‘रामायण’’ सीरियल का प्रसारण दोबारा किया जाये, जिसे सरकार ने गम्भीरता से लिया और रामायण सीरियल के पुनः प्रसारण का निर्णय लिया। मैं कक्षा आठ में थी, जब मैंने पहली बार दूरदर्शन पर रामायण देखी थी। तब रामायण एक एडवेंचर, मैजिकल और सिर्फ भगवान श्रीराम की कहानी लगती थी क्योंकि तब शायद मैं इतनी समझदार नहीं थी। लेकिन आज जब दोबारा रामायण पूरे ध्यान से और गम्भीरता से देखी तो कुछ नया अनुभव किया। रामायण सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं है। अगर आप इसे अपनी लाइफ से रिलेट करें तो रामाण हम सबके लिए शिक्षाप्रद है। रामायण के सभी कैरेक्टर हमें कुछ न कुछ सिखा र...

"कन्हैया" - By रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

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दही - माखन चुराकर कन्हैया बालपन में गोपियों से स्नेह पाया है 🙏 किशोर बन बाँसुरी की मधुर धुन बजाकर सबका दिल चुराया है... 🙏 सुना है यमुना किनारे गोपियो के संग रास रचाते थे तुम कान्हा...🙏 ज्ञानी उद्धव के अहंकार को प्रेम में डूबी गोपियो से तुड्वाया है...🙏  संहार किया अत्याचारी राक्षसॊ का खेल -खेल में तुमने मोहन🙏 कैसा अजब - गजब सा न्याय घनश्याम जमाने को दिखाया है🙏 बुराई का अंत बुरा ही होता है सीख दी सकल संसार को तुमने कृष्णा  🙏 कंश मामा जैसे पापी को मारकर दुनियां को पाप का अंत दिखाया है🙏 भरी सभा में हाथ बढाये जब निर्लज कौरवॊ ने  द्रोपदी के चीर हरण को🙏 बढाकर द्रोपदी का आंचल ऒ कान्हा तुमने अपना पौरुष निभाया है 🙏   शूरवीर अर्जुन के युद्ध में हाथ काँपे जब सामने अपनो को देखकर🙏 योगीराज तुमने देकर गीता का उपदेश डगमगाते अर्जुन को क्षत्रिय धर्म सिखाया है🙏 असंख्य लीला दिखाई है तुमने धरा पर जन्म लेकर मेरे मनमोहन 🙏 बाँसुरी बजाने वाले हाथो ने निरंकुश की सजा के लिये सुदर्शन चक्र भी उठाया है... 🙏 स्वरचित: रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

"मिट्टी से पहचान" - By रूपा राजपूत वसुंधरा, गाजियाबाद

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अजीब लगा पढ़कर की ये क्या है "मिट्टी से पहचान"? हम क्या करेंगे या हम क्यों करें मिट्टी की पहचान?  अरे सुनिए तो सही कि मैं कौनसी मिट्टी की बात कर रही हूँ। जी हाँ मैं कोई चिकनी मिट्टी या रेतीली मिट्टी की बात नही कर रही हूँ ।  इन मिट्टी की अपनी विशेषता होती है । अपनी विशिष्ट भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं के माध्‍यम से विभिन्‍न प्रकार की फसलों को लाभ प्रदान करती है ।  अपितु मैं तो अपने देश की  मिट्टी  की बात कर रही हूँ । अपनी  मातृभूमि की बात कर रही हूँ, जिसकी महिमा के बारे में हमारे आराध्य श्री रामचंद्र जी ने भी कहा था '' जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'' ,  अर्थात् जननी (माता) और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी श्रेष्ठ एवं महान है। हमारे वेद पुराण तथा धर्मग्रंथ शुरू से ही इन दोनों का गुण गान करते आ रहे है, मगर आज हम कही इन दोनों को भूलते जा रहे है । इनकी छवि धूमिल होती जा रही है। इनकी साख आज हमारे व्यवहार और विचारो में कही कम होती जा रही है। आज हर किसी को बस विदेश जाना है वहीं रहना  है  क्यों ? क्योकि वहाँ तनख्वाह...

सैनिक और चिकित्सक - By नीमा शर्मा "हँसमुख" जी, नजीबाबाद

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सैनिक 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 अरे उस पार वालों से जरा जाकर के कह दो तो ।। ना बुझने दे इस पार के घर के चिरागों को। किसी की बुढ़ी माँ है किसी के बच्चे छोटे है॥ किसी की है जवां बीबी जो हुए बे सहारा है ॥ तिरंगे को कफ़न अपना  बनाकर वो तो लेटे है॥ बड़ी खुश है भारत माँ वो उसके बेटे है॥ 🌹🌹🌹 चिकित्सक 🌺🌺🌺🌺🌺 माँ भारती की सेवा में बन रक्षक रहे सदा तत्पर नमन् तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺 संकट छाया महामारी का कोरोना बना भक्षक बन बैठा काल तक्षक नमन्‌ तुम्हे हे चिकित्सक ॥🌺🌺🌺 अपने कर्म को माने पूजा सेवा भाव और न दूजा। रात दिन सेवा में तत्पर चले माँ भारती की सेवा मे पथ पर ॥ घर छोड़ा छोड़ा परिवार करे सद्भावना का व्यवहार ॥ नमन्‌ तुम्हे हे चिकित्सक .......🌺🌺🌺 खुद को कैद की कपड़ो की परतो मे तुम  योद्धा हो सही अर्थों में ॥ दिलाने आजादी महामारी से लड़नी है तुम्हे जंग अड़े खड़े हो माँ भारती के संग ॥ 🙏🙏🙏 नीमा शर्मा 'हंसमुख' जी नजीबाबाद (बिजनौर)