तू उलझी जुल्फों वाली ज़िन्दगी के जैसी है - By Atul Rajput

तू उलझी जुल्फों वाली ज़िन्दगी के जैसी है
तेरी हसी मेरी खुशी के जैसी है,
लड़ती है मुझसे, मेरी खताओं पे उलझती है,
मुझमे तू बस एक अच्छाई के जैसी है,
मेरी फ़िक्र में अक्सर जगती है रात भर,
ख़याल मेरा रखने में मेरी माँ जैसी है,
मुझे खोने की बात पे उलझती है दुनिया से,
मै हू ख्वाब तो तू मेरी नींदो के जैसी है,
हवा, पानी, ज़मी, आसमान सब तुहि मेरा,
क्या कहु तू मेरी दुनिया के जैसी है,
कहती है रूठ के ना बात करो मुझसे,
बताऊ फिर तुझे कैसे के तू मेरी जिंदगी के जैसी है...



अतुल राजपूत

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