संघर्षशील मानव - By Nitin Kumar

एक संघर्षशील दृढ़ प्रतिज्ञ मानव
निरन्तर चलता अपने पथ पर
हृदय में कई उमंगें लिये
विघ्नों को दूर करने के लिए
चला है पथ पर लक्ष्य को पूरा करने के लिए
मन में अन्तर्द्वन्द्व लिये
अतीत को विस्मृत किये
यथार्थ से परिचित होकर
भविष्य के स्वर्णिम स्वप्न संजोकर
चला है पथ पर जीवन को सुन्दर बनाने के लिए।

कैसे करेगा वह खुद को विकसित
बौद्धिक मानव के समक्ष हो सके प्रस्तुत
समाज में पहचान बनाने को तत्पर
उतार-चढ़ाव की दूरी को मिटाने
चला है पथ पर संघर्ष के लिए
जीत-हार का भाव त्यागकर
दृढ़-निश्चय प्रतिबद्ध होकर
अपने कर्मों के वशीभूत होकर
अपना भविष्य उज्जवल करने
चला है पथ पर खुद को बदलने के लिए।

- नितिन कुमार

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