उधार का कारोबार - By Neeraj Rajput

दोस्तों ने की फरमाइश की उनको कुछ नया सुनाऊँ मैं 
अल्फ़ाज़ों को जोड़-तोड़कर दिल उनका बहलाऊँ मैं 


तो शुरू करता हूँ...



कहते हैं कि दुनिया में सब कुछ पैसा नहीं होता है,

लेकिन जो हो तंग हाल उसका बहुत कुछ पैसा ही होता है,
जरूरत जिंदगी पूरी करने को पैसा कैसे कमाऊँ मैं...


जो पैसा पास इकठ्ठा था उस से एक कारोबार किया,

धीरे धीरे बढ़ जाने का सब्र रखकर इन्तजार किया,
फिर हुयी रहमत उस मालिक की, तुमको क्या बतलाऊँ मैं...


नया नाम और नया काम, तरीका भी और नज़ाकत भी,

सलीका भी, शराफत भी, साथ में और एक आफत भी,
उस आफत का नाम उधार, आओ तुमको सिखलाऊँ  मैं...


सब लोगों से मेरी विनती वो ना उधार करें,

नकद खरीदें, रियायत पाएं, मेरा भी उद्धार करें,
गर, नकद लगाकर उधार में बेचूँ, धंधा कैसे बढ़ाऊँ मैं...


दोस्तों के संग दावत-पानी, अब कुछ कम करना है,

ज्यादा वक्त काम में देकर पॉकेट को भी भरना है,
करूँ खर्च जो सोच-समझकर तो कंजूस कहाऊँ मैं...


अपनी ये हालत तुम सबको, कैसे, अरे कैसे समझाऊँ मैं...?



- नीरज राजपूत

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