सपने - By Rv Singh Rajput

ऊँची उड़ानों में,
मन रुपी पंख लहराते हैं
सागर की गहराई को
आसमान की ऊँचाई को
सपनों में माप लेते हैं...


कुछ चाह लिये

सुन्दर आँखों में आँसू लिये
सपने कुछ बूँदें तो
कुछ बुलबुले होते हैं...


मंज़िल वही पाते हैं

जो सपने देखते हैं
नेत्रहीन भी सपने देखकर
प्रयास करते हैं उन्हें पूरा करने का...
क्योंकि सपने आँखों से नहीं,
मन से देखे जाते हैं...


- रामवीर सिंह राजपूत

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