खून चला - Rv Singh Rajput
कल जब ऑफिस में मनाया,
स्वतंत्रता दिवस का जशन ,
मेरे खून के कतरे ने ली मुझसे,
फिर से वही पुरानी टशन।
वो टशन जो वो पहले लिया करता था,
जब मैं प्राइमरी स्कूल में पढता था,
15 अगस्त और 26 जनवरी, देश भक्ति के नारे,
समझता खुद को उस टाइम का अन्ना हजारे।
तब ये मर मिटने को था तैयार,
क्यूंकि चढ़ा था देश भक्ति का खुमार।
लेकिन, मै उससे बोला -
कि भाई साहब आखिर क्या चाहता है?
क्यूँ बेवजह इतनी गर्मी खाता है?
वो बोला -
"मुझे देश के लिए शहीद होना है,
इतिहास में अपना नाम दर्ज करना है। "
मैंने उसे समझाया -
कि क्या फायदा शहीद होकर,
शहीद भुलाये जाते, कुछ पल रोकर।
सरहद पर शहीद होगा, तो क्या उखाड़ पायेगा,
तेरा नहीं दुश्मनों का नाम ज्यादा जपा जायेगा ।
अगर शहीद हुआ, आतंकियों की गोली खाकर,
सरकार गले मिलेगी, पाकिस्तान जाकर|
ग़र शहीद होगा तू, पुलिस की वर्दी में,
कुर्बानी निर्भर करेगी, पैदा हुआ किस जाति में ।
आज के राजनेता नहीं, नेताजी सुभास जैसे,
इन्हें तो बस भरने आते, अपनी जेब मैं पैसे ।
वो तपाक से बोला - तो और कोई तरीका?
सिखा सकूँ देश को, संस्कृति और सलीका ।
मैंने कहा - बच्चू!
तू रोज़ तो आजादी की लड़ाई लड़ता है,
जब ऱोज नॉएडा के जाम में फंसता है,
जिस दिन तेरी ये गर्मी ख़त्म हो जाये,
समझो उसी दिन तू शहीद कहाये।।
- रामवीर सिंह राजपूत
स्वतंत्रता दिवस का जशन ,
मेरे खून के कतरे ने ली मुझसे,
फिर से वही पुरानी टशन।
वो टशन जो वो पहले लिया करता था,
जब मैं प्राइमरी स्कूल में पढता था,
15 अगस्त और 26 जनवरी, देश भक्ति के नारे,
समझता खुद को उस टाइम का अन्ना हजारे।
तब ये मर मिटने को था तैयार,
क्यूंकि चढ़ा था देश भक्ति का खुमार।
लेकिन, मै उससे बोला -
कि भाई साहब आखिर क्या चाहता है?
क्यूँ बेवजह इतनी गर्मी खाता है?
वो बोला -
"मुझे देश के लिए शहीद होना है,
इतिहास में अपना नाम दर्ज करना है। "
मैंने उसे समझाया -
कि क्या फायदा शहीद होकर,
शहीद भुलाये जाते, कुछ पल रोकर।
सरहद पर शहीद होगा, तो क्या उखाड़ पायेगा,
तेरा नहीं दुश्मनों का नाम ज्यादा जपा जायेगा ।
अगर शहीद हुआ, आतंकियों की गोली खाकर,
सरकार गले मिलेगी, पाकिस्तान जाकर|
ग़र शहीद होगा तू, पुलिस की वर्दी में,
कुर्बानी निर्भर करेगी, पैदा हुआ किस जाति में ।
आज के राजनेता नहीं, नेताजी सुभास जैसे,
इन्हें तो बस भरने आते, अपनी जेब मैं पैसे ।
वो तपाक से बोला - तो और कोई तरीका?
सिखा सकूँ देश को, संस्कृति और सलीका ।
मैंने कहा - बच्चू!
तू रोज़ तो आजादी की लड़ाई लड़ता है,
जब ऱोज नॉएडा के जाम में फंसता है,
जिस दिन तेरी ये गर्मी ख़त्म हो जाये,
समझो उसी दिन तू शहीद कहाये।।
- रामवीर सिंह राजपूत

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