बस यही था ना मेरा कसूर - By Vipul Rajput 'Mahiyan'

शादियों का सीजन है। एक शादी में गया उसमे देखा कि एक व्यक्ति जो शादी कि व्यवस्था देख रहे थे उन्होंने दो बच्चों, जो फटे, पुराने और गंदे कपडे पहने हुए थे, उनको खाने के काउंटरों से पीटना शुरू किया और दूर ले जाकर एक कमरे में बंद करके इतनी सर्दी में उनके कपडे उतार कर खूब पीटा, मैं यह सब देखकर उन्हें छुड़ाने गया तो कारण पता चला कि  चोरी छिपे खाना खा रहे थे, बड़ी मुश्किल से उन्हें छुड़ाकर भेजा। मेरी इन पंक्तियों में अपनी हालत को बयाँ कर रहा है वह बच्चा... ध्यान से पढियेगा। अंत में एक सन्देश भी है, और टीम स्वयं कि एक पहल भी, उसे सभी के साथ साझा अवश्य करें। धन्यवाद।


बस यही था ना मेरा कसूर
अपने पेट कि भूख मिटाने के लिए
चोरी छिपे शादी में घुंसा था मैं
सोचा कि आज पेट भर लूँगा 
और अच्छी अच्छी चीज खाऊँगा।

मैं और मेरा एक साथी 
खाने के काउंटर तक पहुँच गए
वाह चाऊमीन, देखकर मुँह में पानी आ गया
मैंने एक प्लेट चाऊमीन ले चुका था 
लेकिन मेरा साथी ना ले पाया
क्योंकि एक अंकल ने आके पीछे से पकड़ लिया
हम दोनों को घसीट कर दूर ले गए
इतनी तेज़ मेरे सर पर मारा कि 
चाऊमीन की प्लेट मेरे हाथ से गिर गयी
और ज़मीन पर फ़ैल गयी
फिर हम दोनों को वो अंकल एक कमरे ले गए
कमरा बंद करके, हमारे कपडे उतारकर
हम पर बहुत ज़ोर-ज़ोर से लात-घूंसे बरसाए इतनी सर्दी में
एक तो फ़टे पुराने कपडे और ऊपर से ये ठण्ड
भला हो एक मानस का
जिसने हमें उस जल्लाद से बचाया

पकड़कर इस कदर मारा हमें
कपडे उतारकर भी मारा हमें 
बस यही था ना मेरा कसूर 
कि मैं गरीब हूँ, भूखा हूँ
मेरे शरीर पर जो कपडे हैं
फ़टे पुराने और गंदे हैं
क्या यही था कसूर था मेरा
जो इस कदर गिरा गिरा कर मारा    

मैं जनता हूँ कि...
अगर मेरी तरह और भी बच्चे ऐसे आ जाएँ 
तो खाने में लग सकती है कमी
और.... और आपके मेहमानों को भी तो हो सकती है परेशानी 
मुझसे, मेरे गंदे कपड़ों से 
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है?
जब खाना बचता है तो आप उसे फेंक देते हो 
उस खाने को कूड़ेदान में सड़ते हुए हमने ही देखा है ।

गौर करो......
थोड़ा सा समय और लगाकर 
हम जैसों के बारे में सोचकर
देश के अन्नदाता किसान के बारे में सोचकर
अगर उस खाने को बर्बाद ना होने दें 
और हम जैसे अनेकों गरीब और बेसहाराओं को ही खिला दें।
कूड़ेदान से चुगकर ना खाया
चलती शादी में घुँस कर खाया
बस यही था ना मेरा कसूर?

विपुल राजपूत 'माहियान'


दोस्तों, शादियों, पार्टियों में खाना बर्बाद होने से बचाने के लिए "टीम स्वयं" ने एक कदम उठाया है कि आप बस टीम स्वयं को सूचना देंगे कि खाना बचा हुआ है, टीम स्वयं खुद जाकर आपको पैकिंग के लिए सामान देगी, आप पैक करके दे देंगे। भूखे, गरीब व जरूरतमंदों तक पहुँचाने का काम टीम स्वयं करेगी।

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