कौन है नारी? - By Ricky Rajput
हजारों ख्वाहिशों को दिल में दबा के,
सैकड़ों सपनों को पलको में छुपा के,
दर्द की टीस को सहते हुए, जो मुस्कुराती है,
हां वही, बस वही है जो नारी कहलाती है।।
छोड़ के सब रिश्ते नाते, छोड़ के सब खेल खिलौने,
भूल के बचपन की यादें, भूल के आंगन के कोने,
मां बाप भाई छोड़ कर, तुम्हे सब कुछ बनाती है,
हां वही, बस वही है जो नारी कहलाती है।।
तम्मना तो है उड़ने की, पर हौंसला नहीं है,
चिरैया है वो, पर उसका कोई घोंसला नहीं है,
एक जीवनसाथी की खातिर जो सब कुछ भूल जाती है,
हां वही, बस वही है जो नारी कहलाती है ।।
- रिक्की राजपूत
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