तुम्हारी तस्वीर - By Neeraj Rajput
बेहतर है कि तेरी अब तस्वीर सजा लें हम
ख़्वाबों की इस तरह ही ताबीर बना लें हम
बस चंद नसीब वाले ही दीदार तेरा पाते हैं
तस्वीर को जब चाहे आँखों में बसा लें हम
इंकार तेरा लेता है इम्तेहान हमारा
तस्वीर से जब चाहे इकरार करा लें हम
तुमसे मिलें भी अगर तो दर है जुदाई का
तस्वीर को जब चाहे पहलू में छुपा लें हम
तू रूठ जाये कहीं, हर वक्त फ़िक्र है यही
तस्वीर अगर रूठे, रूठे तो मना लें हम
तुम तक पहुंचना मुश्किल है चाँद पाने के जैसा
तस्वीर को जब चाहे सीने से लगा लें हम
- नीरज राजपूत
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
बहुमूल्य टिप्पणी के लिए आपका आभार 🙏🏻