मुझे भी हक़ था जीने का - By Rv Singh Rajput

Hello friends, Some lines are dedicated to Jyoti Singh Pandey who has got justice now But it's important that we don't let the fire of change die out.


मुझे भी हक़ था जीने का,
नहीं बंधकर रहना चाहती मैं अब,
इन बेड़ियों में खोखले समाज की,
जहाँ मेरे अस्तित्व को ही,
स्वीकारा नहीं गया आज तलक।


जीना चाहती थी मैं,

आखिर मुझे भी हक़ था,
जीने का, हंसने का,
पर आज मेरी हालत देखो जरा,
भीगी पलकें है, जो होनी थी,
बाबुल का घर छोड़ते वक्त,
खुशियों से भर दे जो मेरी गोद,
मुझे भी चाह थी ऐसी किलकारी की।


लेकिन शायद कुछ अच्छा हो सके,

मेरी इस कुर्बानी के बाद जहाँ में,
सबक ले सकें वो दरिन्दे।


दोस्तों...

जलाये रखना अपने दिलों में ज्योति,
ख़ाक न कर दो जब तलक गुनाहगारों को।।

- रामवीर सिंह राजपूत


Hats off to the father of Jyoti Singh Pandey, the brave heart for revealing her name to the world and setting an example for the country.


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