तेरी जुदाई ही काफी है - By Neeraj Rajput

तेरी जुदाई ही काफी है,
खुदकशी के लिए...


दिल का दर्द अश्कों का पैमाना,

तन्हाई ही काफी है, मयकशी के लिए...


अधूरी तमन्ना, बेइंतहां चाहत,

ये उल्फत ही काफी है, जिंदगी के लिए...


ना मंदिर को जानूं मैं, ना मस्जिद मेरे काम की,

तेरी सूरत ही काफी है, बंदगी के लिए...


रात होते ही बुझा देता हूँ सारे चिरागों को,

मेरा दिल ही काफी है, तेरी यादों में जलने के लिए...


जरूरत नहीं है मुझको किसी सहारे या सवारी की,

बस दो कदम ही काफी हैं, तेरे साथ चलने के लिए...


नीरज राजपूत

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