तुमसे ना हो पायेगा विपुल - By Vipul Rajput 'Mahiyan'

कई बार मैंने कुछ लिखने का सोचा, लेकिन कभी भी, कुछ भी ना लिखा पाया... आज मन में ठान लिया था की कुछ लिखकर ही रहूँगा। 27 सालों में पहली बार कुछ लिखा है, आप सभी के लिए "अपना कॉलम" पर पब्लिश कर रहा हूँ।  नीचे अपना कमेंट जरूर दें, झूंठी तारीफ नहीं करनी है।


लिखना चाहता था अक्सर
लेकर कलम और कागज
बस थोड़ा सोचकर, थोड़ा जज़्बातों को टटोलकर
मगर मजबूर...
सोचता था... कि तुमसे ना हो पायेगा।

कोरा कागज़, कोरा ही रहा
कलम भी बस बुत ही बना रहा
ना जाने कितनी बार कोशिश की
सोचा कि लिख, कुछ तो लिख
लेकिन हमेशा की तरह वही होता रहा
अब तो कागज और कलम दोनों ने खुद मेरे कान में कहा
बेटा..... तुमसे ना हो पायेगा।
   
आज (1 दिसम्बर 2018) फिर से मन में आया
उठाई कलम और लिया कागज़
विपुल, आज तो लिख ही दे कुछ
उतार दे कलम की स्याही इस कोरे कागज पर
आज कागज को कोरा नहीं छोड़ा जायेगा
और फिर लिखा, कुछ तो लिखा....
पता नहीं आप लोगों को कुछ समझ भी आयेगा?
अब आप लोग ही बताओ कि कैसा लिखा
शायद.........  आपके मन में भी आये.....
बेटा..... तुमसे ना हो पायेगा।


- विपुल राजपूत 'माहियान'

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राम हमारे आये हैं - By Vipul Rajput 'Mahiyan'

माता-पिता का करें सम्मान - By Montu Rajput

आओ नवजीवन की शुरूआत करें - By Montu Rajput (Bhopal)