मासूम सा चेहरा तुम्हारा - By Rv Singh Rajput

मासूम सा चेहरा तुम्हारा,
उतनी ही प्यारी मुस्कराहट,
जो कि आहट होती है हमेशा,
मेरे जीवन में आने वाली,
खुशनुमा बारिश की,
घुंगराले बाल, जिनमें फंस जाता हूँ,
मैं बार-बार, हर बार,
उस घने साये का सुकून पाने को।


कभी तुम्हारे चोड़े माथे पर,
माप लेता हूँ मैं,
अपने ख्वाबों की जमीन,
कभी तिरछी नज़रों से तुम्हारा मुझे देखना,
इशारा होता है,
तुम्हारे दिल की उथल पुथल का,
कभी तुम्हारे कान में पड़े रंग बिरंगे झुमके,
अहसास दिलाते हैं मुझे,
कि तुम ही हो वो चित्रकार,
जो बनाएगी,
मेरी बेरंग जिंदगी को रंगीन,
मुस्कराते वक्त गालों के गड्ढे,
यूँही नहीं तुम्हारे बेवज़ह,
इसमें भी तुम्हारी एक अनूठी अदा है,
जब भी तुम्हारी मुस्कराहट पे फ़िदा हुआ,
फिसल कर गिरा इनमें ही,
न निकल पाया चाहकर भी,
मैं बार-बार, हर बार,
या शायद तुम नहीं चाहती सुजाता,
कि मैं दूर जाऊं तुमसे।


- रामवीर सिंह राजपूत

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रसंग - मन चंगा तो कठौती में गंगा

फौजी बेटा By Atul Rajput

आओ नवजीवन की शुरूआत करें - By Montu Rajput (Bhopal)