निंदिया - By Rv Singh Rajput
निंदिया तू आ रही है ना?
मेरे दोस्त से मिलने,
उस हुस्न का दीदार करने?
तो लाना अपने साथ ख़ुशी,
खुशबू मस्त रंगीन फिज़ा की,
हवा का झोका गर्म हो,
क्यूंकि उसे आज जुखाम हुआ है,
सहलाना उसे तू प्यार से,
अपनी बाहों में लेकर,
उसके बालों में अपनी अंगुली घुमाना,
देना उसे वो सुकून,
जो तूने उसे आज तक ना दिया हो,
क्यूंकि उसे आज जुखाम हुआ है।
लाना अपने साथ हसीं सपने भी,
वो सपने जो लाते हैं,
उसके होठों पे मुस्कराहट।
पर ध्यान रहे,
मत टूटने देना सपने अधूरे,
ना होने पाए बेचैन वो एक पल भी,
क्यूंकि उसे आज जुखाम हुआ है।
चादर बनकर लिपट जाना जिस्म से,
ना लग पाए तनिक भी सर्द हवा,
होले-होले सिर दबाना उसका,
ना हो पाए बुखार-खांसी,
मत निकलने देना,
अपने आगोश से,
क्यूंकि उसे आज जुखाम हुआ है।
लेकिन, हाँ ये भी ध्यान रखना,
जब कल सुबह जाएगी तू,
विदा होकर उससे दूर,
तब मत ले जाना अपने साथ वापस,
वो ख़ुशी, वो हर सुकून,
जो देगी तू उसे आज रात,
ताकि स्वस्थ हो जाए वो जल्दी,
क्यूंकि मुझे उससे प्यार हुआ है।
- रामवीर सिंह राजपूत
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