नंगूदीन - By Rv Singh Rajput
Hello friends, Rv's lines.... dedicated to all those "नंगूदीन" who really learn how to be cool in different times (ups and downs) in life. Hope you will enjoy.
ऐसे क्या देख रहे हो,
ग़र तन पे पूरे कपड़े नहीं,
तो क्या मेरे सपने नहीं?
वो सपने जो साकार होंगे एक दिन,
तब मेरी माँ भी बेबस नहीं होगी,
"गर्मी बहुत है, ऐसे ही घूमले"
कहकर नहीं समझाएगी,
मुझे और खुद को भी।।
तब ना ही कोई चिढ़ाएगा मुझे,
"नंगूदीन" कहकर बिना बात के,
कुछ तो शायद प्यार में बोलते हैं,
लेकिन उस स्वाभिमान का क्या?
और जो सच्चाई मेरे जीवन की?
तब जब देखता हूँ गर्मी में भी,
पहने हुए पूरे कपड़े उन हमउम्र को,
जैसे मुझे नसीब नहीं होते सर्दी में भी,
और फिर बेबस माँ की नयी दिलासा,
कि बेटा सर्दी को सहन करना सीख।।
मेरा मन है की अभी तोडकर,
ये लोहे जैसी बंदिशे उम्र की,
छलांग लगा दूँ, और दौडू उस ओर,
जहाँ हैं मेरे सपनों का स्टेशन,
खुद जीवन-गाड़ी का हूँ मैं चालक।।
तब माँ गर्व कर सके मुझ पर,
और मैं माँ से बोलूँ -
"माँ, तूने ही सर्दी-गर्मीं से लड़ना सिखाया,
तभी तो आज इस काबिल बन पाया।।
- रामवीर सिंह राजपूत


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
बहुमूल्य टिप्पणी के लिए आपका आभार 🙏🏻