मैं साक्षी हूँ - By Rv Singh Rajput
The girl is saying about her freedom and domination in modern life. This is dedicated to all of the girls.
मैं साक्षी हूँ...
हर वक्त कैसे लाऊं अपने होंठों पे हंसी,
भला जब बदन में चूब रहे हों कांटे।
कैसे बनाऊं अपने लफ्ज़ों को सरगम,
जबकि मन ताप रहा हो, ज़ुल्मों सितम से।
मैं साक्षी हूँ - हर कुर्बानी की,
बदस्तूर पनपी चिंगारी की,
भला क्यूँ लिबास को ही,
निशाना बनाते हो हर बार,
मजबूर करते हो जकड जाने को,
लज्जा के नाम पर जंजीरों में,
तहखानो में, अंधेरों में।
लेकिन, देखो जरा मेरी हंसी,
अब, निशानी है मेरे स्वाभिमान की,
न लगा पायेगा अब कोई,
मेरी मुस्कराहट पर बंदिशे,
और न मिटा पायेगा, मेरी ख्वाइशों को,
नींद में देखा सपना बताकर।
ये रुबाब यूँही बरक़रार रहेगा अब सदा,
न डिगा पायेगा अब कोई, मुझे मेरे रास्ते से,
आखिर कब जलधारा मुड़ी,
सिमटने को, डरकर तूफ़ान से।।
- रामवीर सिंह राजपूत
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