ऐ मेरी प्रिय स्वेटर - By Rv Singh Rajput
दूरियां अब कम हुई, तेरे मेरे दरमियाँ,
मेरी सांसें मेरे सुकून को करती है बयां।
जब तू नहीं थी, तेरे ना होने से बेचैनी थी,
अब तू है तो, फिजा भी रूहानी है।
क्या बताऊ तेरी बाहों में जन्नत है मेरी,
अब तो बस तुझसे ही खुशियाँ है मेरी।
तू संग है तो, मंजिल आसान हो जाती है,
नहीं तो कईयों को अकेले तड़पते देखा है।
लेकिन एक बार फिर ये जुदाई सहनी होगी,
और शायद ना मिल सकेंगे फिर कभी।
क्योंकि कोई और तुझे मुझसे ज्यादा मोहब्बत करता है,
बेचारा गरीब जो रोजाना फुटपाथ पर ठिठुरता है।
उसे जरुरत है तेरी मुझसे ज्यादा, ऐ मेरी प्रिय स्वेटर।।
- रामवीर सिंह राजपूत
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