जीवन मेरा आज एक हार है - By Kamendra Kumar Rajput (KKR)

जीवन मेरा आज एक हार है
शायद कल तक मैंने हर खेल जीता है
कल तक थी जो हर जीत की खुशी मेरी
आज मेरे खयालों की वो बस एक कविता है...

कलम है ये साथ मेरे, आज शब्दों मे भी नरमाई है 
लेकिन मैं एक शायर नहीं जो शब्दों में सब कुछ कह दूँ,
मेरे तो मन मे एक बात समाई है 
वो मन कि स्मृति मेरे लिए पूरा संसार है 
लेकिन जीवन मेरा आज एक हार है.... 

अक्सर शब्दों की बेला से पहले भी सजाया था मैंने 
उन सजी हुई यादों से ख़ुद को बहलाया था मैंने 
आज फिर मेरे ख़यालों में उसकी यादों ने किया श्रंगार है
स्पर्श नहीं किया कभी मैंने उसे, ख़यालों  की बस दरकार है 
बस एक उज्जवल सी छवि है मेरे मन में उसकी 
पूरी कवीता का बस यही एक आधार है
प्यार करना, यादों मे जीना ये ही शायद जीवन का सार है
बस यही सोचकर, जीवन मेरा आज एक हार है... 

- कामेंद्र कुमार राजपूत 


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