Love Those Days (Miss You Guys) - By Atul Rajput

राह देखी थी इस दिन की ना जाने कब से
Future के सपने सजा रक्खे थे न जाने कब से
बड़े उतावले थे जाने को, जिन्दगी का अगला पड़ाव पाने को
पर न जाने क्यों दिल में आज कुछ और आता है
वक़्त को रोकने का जी चाहता है...
जिन बातों को लेकर रोते थे, आज उन पर हँसी आती है
ना जाने क्यों आज उन पलो की बहुत याद सताती है
कहा करता था के बड़ी मुश्किल से इन कमीनों को सह गया
पर आज ना जाने क्यों लगता है के कुछ पीछे रह गया
कही-अनकही हज़ारों बातें रह गयी
ना भूलने वाली बस यादें रह गयी
मेरी टाँग अब कौन खींचा करेगा?
बस मेरा सर खाने को कौन मेरा पीछा करेगा?
जहाँ 2000 का हिसाब नहीं, वहाँ 2-2 रुपए के लिए कौन लडेगा?
कौन रात भर जाग कर साथ पढ़ेगा?
कौन मेरा लंच मुझसे पूछे बिना खायेगा?
कौन मेरे नए नए नाम बनाएगा?
आनंद बेकर्स के यहाँ MAAZAA किसके साथ पियूँगा?
वो हसींन पल किसके साथ जियूँगा?
ऐसे दोस्त कहा मिलेंगे, जो खाई में भी धक्का दे आये
और फिर बचाने के लिए पीछे कूद जाए
मेरी शायरी से परेशान कौन होगा?
मुझे Seriously पढ़ते देख हैरान कौन होगा?
कौन कहेगा चल बे तेरे जोक पे हँसी नहीं आई,
कौन पीछे से बुलाके कहेगा आगे देख भाई
संतोमालन की गलियों में चक्कर कौन काटेगा?
अपने रोज बदलने वाले प्यार के किस्से मेरे साथ कौन बाँटेगा?
Exam से एक दिन पहले किसके साथ Cricket खेलूँगा...
कोई भी परेशानी अब अकेले कैसे झेलूँगा
किसके लिए जाऊंगा अब Richa और Suchi की गलियों में,
किसके साथ मज़ा पाऊंगा जिंदगी का, बस मूंगफलियों में
रास्ते में सांड के ऊपर धक्का देना, या नाली में पत्थर फेक कर गन्दा करना,
ना जाने अब ये कब होगा,
वादा करो यारो के ये सब होगा...
मेरे साथ कत्था फैक्ट्री पर Omlate खाने कौन जायेगा?
2 लीटर Maazaa पीने की शर्त कौन लगायेगा?
कौन मुझे मेरी क़ाबलियत पर भरोसा दिलायेगा?
और ज्यादा उड़ने पर ज़मीन पर लायेगा,
लड़की से बस बात करने पर Treat कौन माँगेगा 
पीरियड छोड़कर मेरे साथ कौन भागेगा
मेरी कविता कौन पढ़ेगा, और कौन इसे सच में समझेगा?
बस एक बात से डर लगता है दोस्तों,
कहीं हम अजनबी न बन जाए दोस्तों,
चाहे कितना भी हँस लेना आज इसे पढ़कर,
मैं बुरा नहीं मानूंगा,
बस इस हसी को अपने दिल में बसा लूँगा,
और जब याद आएगी तुम कमीनों की, तो इसे लेकर ही थोडा मुस्कुरा लूँगा।।

अतुल राजपूत


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