माता-पिता का करें सम्मान - By Montu Rajput
जन्म देने वाले हमारे माता-पिता अपना सारा जीवन परेशानियों और दुख में बिता देते हैं। स्वयं भूखे प्यासे रहते हैं और अपनी सभी आवश्यकताओं को हमेशा कम करके अपने बच्चों के सपने पूरे करते हैं। दुनिया में सभी माता-पिता चाहते हैं कि हमारे बेटा-बेटी पढ़ लिखकर अपने सपनों को पूरा करें, अच्छे संस्कार प्राप्त करें। इसी आशा से अपने कलेजे के टुकड़े को भेज देते हैं अपने से दूर, उनकी इच्छा के अनुसार पढ़ने। और बदले में आज की युवा पीढ़ी क्या कर रही है? आज बस अपने निजी स्वार्थ के लिए बूढ़े माता-पिता को घर में अनदेखा किया जाता है। अकसर देखने में आता है कि बेटा-बेटी कानून का हवाला देकर कहते है कि अब हम बालिग हो गए हैं, हमें अपने फैसले स्वयं करने का अधिकार है, आपको हमारी निजि जिंदगी में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। इस प्रकार की बातें कहकर अपने माता पिता के सपने तोड़ने और उन्हें जीते जी मारने का काम करते हैं।
आज के समय में लव मैरिज के नाम पर अपने माता पिता को अनदेखा करने में आज की युवा पीढ़ी अपनी शान समझती है। प्यार करना गलत नहीं है, लेकिन मर्यादा में रहकर किया गया प्यार सच्चा होता है। अपने जीवन की सभी छोटी-बड़ी बातें अपने माता पिता, अपने बड़ों से खुलकर बात करके अपने परिवार के सभी संस्कारों को निभाना यही सच्चा प्यार होता है, लेकिन आज के युवा एक अनजान व्यक्ति जो उसे साल दो साल से जानता है उसे ही सच्चा प्यार मान लेते हैं और अपने सभी बड़ों से बिना कोई विचार-विमर्श किये कोर्ट मैरिज कर लेते हैं और फिर कहते हैं हम सच्चा प्यार करते हैं और यह शादी करना हमारा कानूनी अधिकार है। क्या कभी उन बेटा-बेटियों ने सोचा है कि एक पिता पर उस समय क्या बीतती है? हर एक पिता अपने बेटे-बेटी की शादी अपने सामर्थ्य के अनुसार अच्छी से अच्छी करना चाहता है लेकिन उनके बच्चों के गलत फैसले उसे रोने पर मजबूर कर देते हैं। उनके माता-पिता व परिवार, जमाने के सामने जाने से बचते हैं। वह परिवार न जाने कितने अपशब्दों को सुनकर भी चुप रहता है, कारण होता है वह बेटा-बेटी जो सभी मर्यादा तोड़ कर अपने ही जन्मदाता को गलत साबित करने की जिद करते हैं और जब इस प्रकार के कार्य समाज में होते हैं तो समाज को इसका बहुत बड़ा नुकसान भी होता है। ना जाने कितने साधारण परिवारों के बच्चों को बाहर पढ़ने जाने से रोक दिया जाता है। जिसका परिणाम होता है उस समय की नई पीढ़ी अकसर उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती है। इसलिए आज के इस आधुनिक युग में आवश्यकता है कि सभी युवा अपने माता-पिता और परिवार में खुलकर अपने सभी छोटी-बड़ी बातों को साझा करें और माता-पिता भी अपने बच्चों को समय-समय पर उनसे उनके बारे में बातें करते रहें ताकि बच्चे बिना डरे अपनी बात रख सकें।
‘‘कभी जो परिवार के बाग का माली था आज उसकी झोली खाली है,
ना जाने कैसी सभ्यता है अनपढ़ बाप अब लगता गाली है।
एक वक्त की रोटी देना भी अब तो समझते एहसान है,
बंजर है सपनों की धरती उम्मीदों का सूखा आसमान है।।’’
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- मोंटू राजपूत (नमन डिजिटल स्टूडियो एंड लैब, बिजनौर)
धन्यवाद विपुल अपने कोलम मे, हमारे कुछ चंद शब्दों को स्थान देने के लिए
जवाब देंहटाएंअरे मोंटू जी आपने बहुत ही अच्छा लिखा, भला मैं कैसे इसको अपने ब्लॉग का अंग बनाने से अपने आप को रोक पाता? ये आपका बड़प्पन है।
जवाब देंहटाएं🙏
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