सत्य - By Neeraj Rajput
थे विश्व युद्ध दूसरे में कभी, जर्मन रूस साथ-साथ यहाँ,
जब हुई लड़ाई दोनों में फिर अलग-अलग हो गये यहाँ।
दुनिया की यह पाला बदली थी भारत में भी हुई यहाँ,
सभी रूस समर्थक भारत में अंग्रेजों के साथी बने यहाँ।
भारत छोड़ो संग्राम में जब गाँधी ने नारा दिया यहाँ,
अब करो या मरो जो भी चाहो तब भड़क उठी हिंसा थी यहाँ।
गाँधीवादी थे जेलों में गरम दल वाले आये साथ यहाँ,
आजाद हिंद सेना के साथ प्रकटे नेताजी तभी यहाँ।
तब राजधानी इम्फाल बनीं नेता सुभाष के शासन की,
थी धाक जमीं तब भारत में इस स्वतंत्र देश के शासन की।
जनक्रांति और सैनिक विद्रोह बनी बड़ी समस्या शासन की,
अंग्रेजी हुकूमत घबराई उड़ गई नींद तब शासन की।
गाँधी नेहरू को सत्ता सौंप चली अंग्रेजी शासन ने चाल यहाँ,
थी युद्ध ने भी करवट वदली हारे जर्मनी जापान यहाँ।
नेताजी के मरने की भी मिल गई दुःखद समाचार यहाँ,
बलिदान व्यर्थ उन शहीदों का करते थे जो देश से प्यार यहाँ।
सत्ता के लोभी नेताओं ने भुला दिया वह वीर यहाँ,
हस्ताक्षर कर के प्रत्यर्पण पर बना दिया गुनहगार यहाँ।
लाखों दीवानों ने गर्दन कटवाई यहाँ,
सच कहता हूँ तब ही आजादी आई यहाँ।
भारत माता के लाल अमर जो फाँसी पर झूले थे यहाँ,
देश प्रेम और राष्ट्रभक्ति के भी गर्व से फूले थे यहाँ।
करके षडयंत्र सत्ता लोलुपता में यह गलत बात उड़ाई यहाँ,
शहीद तो आतंकवादी थे और आजादी चरखे से आई यहाँ।
- नीरज राजपूत

Bhut sunder
जवाब देंहटाएंBhut acchhee
जवाब देंहटाएंसत्य वचन नीरज जी
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